Nalanda News: नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड क्षेत्र के डिहरी पंचायत भवन में बुधवार को 'मां के दूध का महत्व' विषय पर एक दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया. फाइनेंशियल इंक्लूजन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री माताओं को स्तनपान के महत्व, नवजात शिशु के सही पोषण और मातृ स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना था.
मां का पहला पीला गाढ़ा दूध शिशु के लिए प्राकृतिक टीका
कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्य विशेषज्ञों और टीम लीडर ने महिलाओं को शिशु पोषण से जुड़ी अहम जानकारियां दीं:
- पहला दूध है बेहद जरूरी: जन्म के तुरंत बाद शिशु को मां का पहला गाढ़ा-पीला दूध (कलोस्ट्रम) अवश्य पिलाना चाहिए. यह नवजात के लिए प्राकृतिक टीके की तरह काम करता है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मजबूत बनाता है.
- 6 महीने तक केवल स्तनपान: शिशु को जन्म के शुरुआती 6 महीनों तक केवल और केवल मां का दूध ही देना चाहिए. इसके बाद पूरक आहार के साथ-साथ स्तनपान जारी रखने की सलाह दी गई.
टीम लीडर सोनी कुमारी ने कहा कि मां का दूध शिशु के संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे उत्तम आहार है. नियमित जागरूकता से बच्चों में कुपोषण की समस्या को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है.
जनप्रतिनिधियों और कर्मियों की रही सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम में चेरो पंचायत के मुखिया अशोक रजक और सरिता देवी समेत पंचायत के प्रतिनिधि, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविकाएं, वार्ड सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं शामिल हुईं. शिविर को सफल बनाने में क्षेत्रीय समन्वयक निमा कुमारी, टीम लीडर सोनम कुमारी तथा एसीओ आयशा की महत्वपूर्ण भूमिका रही. सभी वक्ताओं ने महिलाओं से अपील की कि वे स्तनपान से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों पर ध्यान न दें और डॉक्टरी सलाह के अनुसार ही शिशु को सही पोषण दें.
