सिलाव. अंचल के नालंदा थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़गाम मौजा में नालंदा खंडहर के पश्चिम दिशा स्थित प्राचीन टीले की अवैध कटाई कर मिट्टी का खुलेआम व्यापार किया जा रहा है. सूचना मिलने के बावजूद स्थानीय प्रशासन आंख बंद किए हुए है. टीले की कटाई के दौरान प्राचीन ईंट और अन्य अवशेष भी मिलने की बात सामने आई है. सूत्रों के अनुसार स्थानीय मिट्टी माफिया द्वारा सरकारी भूमि और प्राचीन टीले की मिट्टी काटकर लाखों रुपये में सड़क निर्माण कंपनियों को बेचा जा रहा है. इस संबंध में खनन विभाग को भी कोई जानकारी नहीं दी गई है और बिना किसी सरकारी आदेश के अवैध कटाई लगातार जारी है. जबकि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के आसपास के क्षेत्र में बिना अनुमति किसी भी प्रकार के खनन पर पूर्ण प्रतिबंध है. यदि किसी कारणवश खनन किया जाना हो तो इसके लिए पुरातत्व विभाग की अनुमति और जानकारी अनिवार्य होती है. इसके बावजूद नियम-कानून को ताक पर रखकर मिट्टी माफिया खुलेआम खनन कर रहे हैं और प्रशासनिक उदासीनता के कारण उनका हौसला बढ़ता जा रहा है. इस संबंध में खनन जिला पदाधिकारी ने बताया कि उन्हें इस तरह के अवैध खनन की कोई जानकारी नहीं है. यदि अवैध रूप से खनन किया जा रहा है तो मामले की जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाएगी. वहीं जब इस विषय में सिलाव अंचलाधिकारी आकाशदीप सिन्हा से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि जब तक कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई जाती है, तब तक वे कोई कार्रवाई नहीं कर सकते, चाहे मामला सरकारी भूमि का ही क्यों न हो. सूत्रों का कहना है कि मिट्टी के इस अवैध व्यापार की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले से है, फिर भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
