अखण्ड सौभाग्य का रक्षक है हरतालिका तीज

हरतालिका तीज सौभाग्यवती महिलाओं का सर्वप्रमुख व्रत है. यह व्रत हर वर्ष भाद्र शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को मनाया जाता है.

बिहारशरीफ. हरतालिका तीज सौभाग्यवती महिलाओं का सर्वप्रमुख व्रत है. यह व्रत हर वर्ष भाद्र शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि को मनाया जाता है. सौभाग्यवती स्त्रियां अपने अखण्ड सौभाग्य की रक्षा के लिये बड़ी श्रद्धा, विश्वास और लगन के साथ हरतालिका व्रत मनाती है. जिस त्याग, तपस्या और निष्ठा के साथ स्त्रियां यह व्रत रखती है, यह बड़ी ही कठिन व्रत है. इसमें महिलाऐं 24 घंटे का निराहार तथा निर्जला उपवास रहकर अखण्ड सौभाग्य की कामना करती है. इस संबंध में पंडित श्रीकांत शर्मा आचार्य ने बताया कि पंचांग के मुताबिक तथा शास्त्रों के अनुसार इस वर्ष हरतालिका तीज 26 अगस्त दिन मंगलवार को मनाया जायेगा. उन्होंने बताया कि हरतालिका तीज का त्यौहार आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है. यह भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है. स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और सफल दाम्पत्य जीवन के लिए यह व्रत रखती हैं. अविवाहित स्त्रियां भी मनचाहे पति की कामना से यह व्रत करती हैं. यह त्यौहार स्त्रियों के बल, समर्पण और त्याग का प्रतीक है. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन व्रत करने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. व्रत को लेकर जिले की महिलाएं तैयारी में जुट गई हैं. वे नये वस्त्र तथा पूजा से जुड़ी सामग्रियों की जमकर खरीदारी कर रही हैं. इससे जिले के बाजारों में रौनक बढ गई है. हरतालिका तीज की पौराणिक कथा:- हरतालिका तीज के पीछे देवी पार्वती के दृढ़ संकल्प की कथा है. देवी पार्वती अपने पिछले जन्म में सती थीं. उन्होंने भगवान शिव का अपमान के बाद अपने पिता दक्ष के यज्ञ में खुद को भस्म कर लिया था. उन्होंने राजा हिमवान की पुत्री पार्वती के रूप में पुनर्जन्म लिया था. वह भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थी. लेकिन उनके पिता ने उनका विवाह जबरदस्ती भगवान विष्णु से करवा दिया था. हताश होकर पार्वती ने चुपके से अपनी सहेली को बताया और नजरों से दूर रहने के लिए उसके साथ जंगल में चली गईं थी. उन्होंने हजारों वर्षों तक भगवान शिव की तपस्या की थी. उनके समर्पण से प्रभावित होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. अपनी सहेलियों के द्वारा हरण किये जाने के कारण ही इस व्रत का नाम हरतालिका तीज पड़ा . हरतालिका तीज व्रत के नियम:- इस दिन कई महिलाओं द्वारा 24 घंटे का निर्जला उपवास रखकर भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा- अर्चना की जाती है. घर की सफाई कर मिट्टी की शिव-पार्वती की मूर्ति बनाकर उनका विधिवत पूजन किया जाता है. पूजा में अक्षत, रोडी, सिंदूर,फल- फूल, बेलपत्र, मिठाई, धूप ,दीप मोली, वस्त्र आदि भगवान शिव तथा माता पार्वती को अर्पित किए जाते हैं. महिलाओं को नए वस्त्र पहन कर तथा पूरी तरह से सुसज्जित होकर ही हरतालिकातीज व्रत करना चाहिए. पूजा में तीज व्रत की कथा भी सुन्नी चाहिए.

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Published by: Santosh kumar singh

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