BiharSharif News: नालंदा के राजगीर शहर स्थित पीटीजेएम सरस्वती विद्या मंदिर में बुधवार को गुरु पूर्णिमा उत्सव धूमधाम से आयोजित किया गया. कार्यक्रम में शिक्षक और विद्यार्थियों ने श्रद्धा के साथ भाग लिया.
दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की हुई शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ गया जी विभाग प्रमुख उमाशंकर पोद्दार और विद्यालय के उपप्रधानाचार्य रामजी प्रसाद सिन्हा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. इसके बाद गुरु पूर्णिमा के महत्व पर विचार प्रस्तुत किए गए.
गुरु जीवन निर्माण के प्रमुख मार्गदर्शक: उमाशंकर पोद्दार
मुख्य वक्ता उमाशंकर पोद्दार ने गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है. गुरु व्यक्ति के व्यक्तित्व, संस्कार और चरित्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं.
पंचकोशीय शिक्षा को बताया जीवन निर्माण का आधार
उमाशंकर पोद्दार ने कहा कि वर्तमान समय में ज्ञान आसानी से उपलब्ध है, लेकिन सही मार्गदर्शन देने वाले गुरु का महत्व आज भी विशेष है. उन्होंने पंचकोशीय शिक्षा को जीवन विकास का आधार बताया.
गुरु अज्ञान से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं
उपप्रधानाचार्य रामजी प्रसाद सिन्हा ने कहा कि महर्षि वेदव्यास की जयंती के अवसर पर गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है. उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि गुरु शिष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं.
महान गुरुओं के आदर्शों को अपनाने की अपील
रामजी प्रसाद सिन्हा ने गुरु सांदीपनि, विश्वामित्र, द्रोणाचार्य, परशुराम और महर्षि वशिष्ठ जैसे महान गुरुओं के जीवन आदर्शों का उल्लेख किया. उन्होंने विद्यार्थियों से उनके बताए मार्ग पर चलने की अपील की.
छात्रों ने गुरु की महत्ता पर रखे विचार
कार्यक्रम के दौरान कक्षा सप्तम के छात्र आदित्य तिवारी, शिवांश कुमार और छात्राएं राबिया सिंह एवं जिया मिश्रा ने गुरु की महत्ता पर अपने विचार रखे. विद्यार्थियों ने गुरु के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त की.
श्रद्धा और अनुशासन से भरा रहा विद्यालय परिसर
कार्यक्रम प्रमुख सुमोद कुमार झा सहित विद्यालय के आचार्यगण, दीदीजी और सभी छात्र-छात्राएं मौजूद रहे. पूरे आयोजन के दौरान विद्यालय परिसर में श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का वातावरण देखने को मिला.
