Women Empowerment: राजगीर के राजकीय डिग्री महाविद्यालय में बुधवार को ‘महिला सशक्तिकरण और सामाजिक परिवर्तन’ विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में महिला शिक्षा, सामाजिक समानता, महिलाओं की भागीदारी, अधिकार और आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर वक्ताओं ने विस्तार से विचार रखे.
शिक्षित महिला समाज की तस्वीर बदल सकती है
नालंदा विश्वविद्यालय की डॉ. अस्मिता सिंह ने कहा कि शिक्षित महिला ही समाज की तस्वीर बदल सकती है. शिक्षा महिलाओं में आत्मविश्वास, जागरूकता और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है. उन्होंने कहा कि शिक्षित महिला अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने के साथ परिवार और समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. महिलाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने और उनकी प्रतिभा को उचित मंच देने की आवश्यकता है.
नारी के अधिकार और स्वतंत्र निर्णय क्षमता को मिले महत्व
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आनंद प्रकाश गुप्ता ने भारतीय इतिहास और साहित्य में नारी की स्थिति पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि नारी को केवल त्याग और सहनशीलता की प्रतिमूर्ति मानने के बजाय उसके अधिकारों, स्वतंत्र निर्णय क्षमता और व्यक्तित्व को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए. महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं के विकास का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की प्रगति से जुड़ा प्रश्न है.
संस्कृति की वाहक है नारी
परीक्षा नियंत्रक डॉ. शारदा कुमारी ने कहा कि नारी संस्कृति की वाहक है, जबकि पुरुष भौतिकता का प्रतीक माना जाता है. भौतिकता में नश्वरता निहित है, जबकि संस्कृति शाश्वत होती है. उन्होंने साहस और संस्कृति को सकारात्मक दिशा देने पर जोर दिया.
डॉ. सुभाषचंद्र ने महिलाओं को सामाजिक रूप से सुरक्षित और सुदृढ़ बनाने के आवश्यक पहलुओं का विश्लेषण किया. डॉ. कुमार सोनू शंकर ने महिला शिक्षा और आत्मनिर्भरता को स्वस्थ समाज की आधारशिला बताया.
कार्यक्रम में कई शिक्षक रहे मौजूद
कार्यक्रम का संचालन डॉ. धीरेन्द्र उपाध्याय ने किया, जबकि डॉ. मनोज रजक ने धन्यवाद ज्ञापन किया. इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य, अतिथि, शिक्षक एवं अन्य लोग उपस्थित रहे.
