Bihar Sharif DM Ultimatum : नालंदा समाहरणालय में आयोजित सेवा संवाद समाधान कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी उदिता सिंह ने साफ कर दिया कि अब जन शिकायतों में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. शुक्रवार को हुई जन सुनवाई में जिले के अलग अलग प्रखंडों और पंचायतों से पहुंचे करीब 35 लोगों की समस्याएं सुनी गईं और मौके पर ही अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए. जिलाधिकारी ने हर आवेदन को गंभीरता से लेते हुए कहा कि अब हर शिकायत का समय पर और सही तरीके से निपटारा होना जरूरी है.
कार्यक्रम के दौरान डीएम ने खुद फरियादियों से सीधे बात की और एक एक मामले की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकार की मंशा साफ है कि लोगों को बार बार दफ्तरों का चक्कर न लगाना पड़े और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान हो. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही सामने आई तो संबंधित अधिकारी पर सीधी कार्रवाई होगी.
जमीन और अतिक्रमण मामलों पर सख्त रुख
जन सुनवाई में सबसे ज्यादा शिकायतें जमीन और अतिक्रमण से जुड़ी सामने आईं. सरकारी जमीन पर कब्जा, भूमिहीन महादलित परिवारों को जमीन नहीं मिलना, जमाबंदी में गड़बड़ी और खरीदी गई जमीन पर अवैध कब्जा जैसे कई मामले सामने आए. इन सभी मामलों को गंभीर मानते हुए डीएम ने अपर समाहर्ता सह जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी को विस्तृत जांच का आदेश दिया.
उन्होंने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और किसी भी तरह की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया.
पेंशन और सामाजिक योजनाओं पर तुरंत कार्रवाई
जन सुनवाई में एक वृद्ध व्यक्ति ने शिकायत की कि पिता का नाम गलत दर्ज होने के कारण कई महीनों से पेंशन नहीं मिल रही है. इस पर जिलाधिकारी ने तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारी को रिकॉर्ड ठीक करने और जल्द भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश दिया.
डीएम ने कहा कि तकनीकी गलती के कारण किसी भी पात्र व्यक्ति को सरकारी योजना से वंचित नहीं किया जा सकता. ऐसे मामलों में त्वरित सुधार जरूरी है.
फर्जी प्रमाणपत्र और पैक्स विवाद की जांच
फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर चयन और पैक्स पुनर्गठन से जुड़े मामलों पर भी डीएम ने सख्ती दिखाई. मेयार पैक्स राजगीर के पुनर्गठन में गड़बड़ी की शिकायत पर उप विकास आयुक्त को समय सीमा के अंदर जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया.
इसके साथ ही स्वच्छता पर्यवेक्षक के चयन में फर्जी प्रमाणपत्र के इस्तेमाल की शिकायत पर भी निष्पक्ष जांच के आदेश दिए गए हैं.
दिव्यांग शिक्षक और अस्पताल निर्माण का मामला
एक दिव्यांग शिक्षक द्वारा प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ाने के आवेदन पर डीएम ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को नियमों के तहत जल्द निर्णय लेने को कहा. वहीं अधिग्रहित जमीन पर आयुर्वेदिक अस्पताल निर्माण से जुड़े मामले की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं.
सभी विभागों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश
डीएम ने साफ कहा कि जन सुनवाई में आए हर आवेदन की मॉनिटरिंग की जाएगी. पुलिस, राजस्व, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और विकास विभाग के अधिकारियों को समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा गया.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी भी स्तर पर देरी या लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी.
नालंदा में आयोजित इस जन सुनवाई ने साफ संकेत दे दिया है कि प्रशासन अब एक्शन मोड में है. जिलाधिकारी उदिता सिंह के सख्त तेवर से उम्मीद है कि लंबित मामलों में तेजी आएगी और आम लोगों को राहत मिलेगी. अब देखने वाली बात होगी कि दिए गए निर्देशों पर कितनी तेजी से अमल होता है और लोगों की समस्याओं का समाधान जमीन पर कितना दिखता है.
