Nalanda News: पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय (PPU) की स्नातक नामांकन प्रक्रिया को लेकर अंगीभूत (Constituent) एवं संबद्ध (Affiliated) महाविद्यालयों में असमंजस और चिंता की स्थिति बनी हुई है. विश्वविद्यालय द्वारा स्नातक स्तर के विज्ञान, कला एवं वाणिज्य संकायों में नामांकन के लिए तीसरी मेधा सूची (Third Merit List) जारी किए जाने के बावजूद आधी से अधिक सीटें खाली पड़ी हैं. विश्वविद्यालय की वर्तमान नामांकन नीति पर शिक्षाविदों ने सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि एक तरफ कॉलेजों की सीटें खाली हैं तो दूसरी ओर हजारों छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा में दाखिला लेने से वंचित हो रहे हैं.
दूर-दराज के कॉलेज अलॉट होने से बढ़ी छात्रों की परेशानी
सूत्रों के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया के तहत जिन छात्र-छात्राओं को उनके गृह जिले या आसपास के स्थानीय महाविद्यालय आवंटित किए गए थे, उन्होंने निर्धारित समय-सीमा के भीतर दाखिला ले लिया. हालांकि, बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को उनके घर से काफी दूर दूसरे शहरों अथवा जिलों के कॉलेज आवंटित कर दिए गए.
दूर-दराज के कॉलेज अलॉट होने से छात्रों के सामने रोजाना आवागमन, हॉस्टल, भोजन और अतिरिक्त खर्चों की गंभीर समस्या पैदा हो गई है. विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए दूसरे जिलों में जाकर पढ़ाई का खर्च उठाना संभव नहीं हो पा रहा है. इस कारण कई छात्रों ने आवंटित कॉलेजों में दाखिला लेने के बजाय नामांकन प्रक्रिया से ही दूरी बना ली.
खाली सीटों से चिंतित कॉलेज प्रशासन, सुधारात्मक कदम उठाने की मांग
तीसरी सूची के बाद भी बड़े पैमाने पर सीटें रिक्त रहने से कॉलेज प्रशासन की चिंता बढ़ गई है. कॉलेजों का कहना है कि पर्याप्त शिक्षकों, आधारभूत संरचना और संसाधनों के बावजूद स्वीकृत सीटों का खाली रहना शैक्षणिक गतिविधियों और विश्वविद्यालय के प्रदर्शन पर नकारात्मक असर डालता है.
शिक्षाविदों और छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि विद्यार्थियों को उनके स्थानीय क्षेत्र व सुविधा के अनुसार कॉलेज चयन की प्राथमिकता दी जाए. खाली रह गई सीटों को भरने के लिए ऑन-द-स्पॉट (Spot Admission) या पुनः विकल्प चुनने का अवसर प्रदान किया जाए. यदि विश्वविद्यालय प्रशासन लचीला रुख अपनाते हुए रिक्त सीटों पर दोबारा आवेदन का मौका देता है, तो हजारों विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र बर्बाद होने से बच जाएगा और कॉलेजों की सीटें भी भर सकेंगी.
