Nalanda Water Bodies Encroachment : जल संरक्षित क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त कराने और उन्हें राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने की मांग को लेकर भारतीय ब्राह्मण सेवा संघ, नालंदा की ओर से एकदिवसीय धरना दिया गया. धरना को संबोधित करते हुए संघ के अध्यक्ष कृष्ण वल्लभ पांडेय ने कहा कि जल संसाधनों के संरक्षित क्षेत्रों पर लगातार अतिक्रमण होने से आने वाले समय में नालंदा मरुभूमि में तब्दील हो सकता है.
नदी, पोखरा और कुओं पर बड़े पैमाने पर किया गया अतिक्रमण
प्रदेश महासचिव पुरुषोत्तम पांडेय ने कहा कि नदी, अहरा, पोखरा, पईन, तालाब एवं कुएं जैसे जल संरक्षित क्षेत्रों पर निजी स्वार्थ के कारण बड़े पैमाने पर अतिक्रमण किया गया है. इसके कारण कभी बाढ़ तो कभी सुखाड़ की स्थिति उत्पन्न हो रही है.
जल संरक्षित क्षेत्रों को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने की उठी मांग
धरना के दौरान आचार्य बालकृष्ण शर्मा ने सरकार से जल संरक्षित क्षेत्रों को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने की मांग की, ताकि इन प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सके.
वक्ताओं ने कहा कि अतिक्रमण के कारण जिले का भूजल स्तर लगातार कम हो रहा है. उन्होंने इसके लिए स्थानीय निर्वाचित नेताओं की तुष्टिकरण नीति और संबंधित सरकारी पदाधिकारियों की निष्क्रियता को जिम्मेदार बताया.
धरने में संगठन के कई पदाधिकारियों और प्रबुद्ध लोगों ने लिया हिस्सा
धरना को अच्युत पांडे, विद्यानंद विद्यार्थी, कंचन कुमार पांडे, अरुण कुमार पांडे, अनिल पांडे, वीरमणी पांडे, सुनील पांडे, संतोष कुमार पांडेय, रविशंकर पांडेय, बलराम पांडेय, राजीव कुमार पांडेय, अनिल कुमार शर्मा, उमाकांत पांडेय, भूषण पांडेय, सत्येंद्र पांडेय, विवेकानंद पांडेय, सौरभ पांडेय, श्याम पांडेय, ओमप्रकाश, जगत पांडेय, गोपाल कृष्ण शर्मा, चंद्रभूषण पांडे, वीरेंद्र पांडे, अशोक पांडे, पंकज पांडेय, अविनाश पांडे, बिंदेश्वर पांडे, रवि रंजन पांडे, राजन उपाध्याय एवं अवधेश पांडे ने संबोधित किया.
