प्याज उत्पादक किसान के खेतों में सड़ने लगी फसल

आंधी पानी के साथ बे मौसम बारिश ने शेखपुरा के प्याज उत्पादकों की कमर पूरी तरह तोड़ दी है. इस तबाही के कारण हुए नुकसान का असर किसानों के पारिवारिक स्थितियों पर सीधा पड़ने लगा है.

शैखपुरा. आंधी पानी के साथ बे मौसम बारिश ने शेखपुरा के प्याज उत्पादकों की कमर पूरी तरह तोड़ दी है. इस तबाही के कारण हुए नुकसान का असर किसानों के पारिवारिक स्थितियों पर सीधा पड़ने लगा है. लगातार हो रहे बे मौसम बारिश के कारण किसानों के खेतों में तैयार प्याज फसल अब सड़ने लगा है. महाजनों ने भी प्याज खरीदने से फिलहाल इनकार कर दिया है. खेतों में ढेर लगाकर बैठे किसान अब अपने घर तक प्याज को ले जाने के लिए खर्च का बहन करने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे. ऐसी स्थिति में किसानों ने फसालों का 60 प्रतिशत से अधिक का नुकसान बताया है. प्याज के साथ-साथ खेतों में रवि फसल का भी बड़ा नुकसान इस बे मौसम बारिश और आंधी तूफान के कारण बताया गया है. बड़ी बात यह है कि 10 अप्रैल से शुरू हुए इस तबाही का आलम ना तो आज तक रुक सका है और ना ही विभाग नुकसान के आंकड़े जुटा पाया है. लंबे अरसे के बाद किसानों के इस तरह से हुए नुकसान ने सीधे पारिवारिक जरूरत पर चोट किया है. कई किसानों के घरों में बेटी की शादियां टालने की स्थिति उत्पन्न हो गई है. तो इसका असर बच्चों की शिक्षा, बीमारियों का इलाज एवं अन्य जरूरत पर भी दिख रहा है. शेखपुरा जिले का मुख्य फसल प्याज की खेती पर निर्भर है. प्याज की खेती से किसान अपने नगदी जरूरत को पूरा करता है. यहां अरियरी, चेबाड़ा, घाट कुसुंबा एवं शेखपुरा के बड़े हिस्से में प्याज की प्रमुख रूप से खेती की जाती है. ऐसे में इन किसानों को हुए नुकसान रूपी जख्म पर मलहम लगता फिलहाल नहीं दिख रहा है. 20 दिन बाद होनी थी बेटी की शादी : शेखपुरा नगर परिषद क्षेत्र के एकसारी गांव के किसान सिद्धेश्वर यादव एवं सुभाष यादव मंगलवार को अपने खेतों में प्याज की ढेर को सुखाने में जुटे थे. इस मौके पर उन्होंने कहा कि मंगलवार को धूप निकलने के बाद प्याज को सुखाने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन प्याज सड़ने की स्थिति में आ पहुंचा है. मई महीने में ठीक 20 दिन बाद बेटी की बारात आनी थी. प्याज उखाड़ने के बाद महाजन को बेचने की बातचीत की हो गयी थी. लेकिन लगातार चार दिनों से आंधी और बारिश नहीं थम रहा है. बारिश और धूप की स्थिति के कारण खेतों में प्याज सड़ने लगा है. स्थिति यह है कि महाजनों ने भी प्याज को खेतों से उठाने से हाथ खड़ा कर दिया है. इतना ही नहीं पहले ही आर्थिक क्षति की मार झेल चुके किसान अब खेतों से प्याज को उठाकर घर तक लाने की हिम्मत नहीं जुटा रहे. अगले वर्ष प्याज बीज के लिए किसानो को होंगी फजीहत : अरियरी प्रखंड के रंका गांव निवासी प्याज उत्पादक बनारसी यादव ने बताया कि किसानों को अगले वर्ष प्याज की खेती करना एक बड़ी चुनौती होगा. इस वर्ष हुए नुकसान के साथ-साथ किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज के लिए दर-दर भटकना होगा. उन्होंने बताया कि प्याज बीज के लिए किसान अपने खेतों में संढा की खेती भी करते हैं. लेकिन इस आंधी और बारिश में वह भी पूरी तरह से नष्ट हो गया. ऐसी स्थिति में किसानों को अब प्याज बीज के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. खेतों में भींगे गेहूं के दाने में आने लगे अंकुर : रांका गांव के किसान लक्ष्मण यादव ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में दो बीघा गेहूं एवं तीन कट्ठा प्याज लगाया था, लेकिन आंधी और बे मौसम बारिश के कारण सारा का सारा फसल खेत में ही रह गया. बारिश में भींगने के कारण गेहूं के दाने अंकुरने लगे हैं. ऐसी स्थिति में वह पूरी तरह खराब हो गया है. मवेशियों के चार के अलावे उसे किसी भी काम में नहीं लाया जा सकता. इस नुकसान के कारण अब सालों भर परिवार को खिलाने के लिए आनाज की भी किल्लत होगी. फसलों के क्षति का आकलन नहीं : 10 अप्रैल से शुरू हुए आंधी बारिश के दौर में पांच दिन बीत जाने के बाद भी कृषि विभाग क्षति का आकलन नहीं कर सका है. हालांकि मंगलवार को पूरा दिन धूप रहने से किसानों को थोड़ी राहत मिली. कृषि विभाग के मुताबिक मौसम में सुधार आने की स्थिति में दो दिन बाद क्षति का आकलन कर लिया जायेगा. ओलावृष्टि और बारिश से शेखोपुर सराय में परवल की फसल बर्बाद : जिले के शेखोपुरसराय प्रखंड में सोमवार की संध्या समय अचानक तेज आंधी के साथ ओलावृष्टि तथा मूसलधार वर्षा ने निमिया परवल की खेती को भारी नुकसान पहुंचाया. स्थानीय किसान दिनेश सिंह, साधु महतो, सुधीर महतो, विनेश्वर यादव, शंभू सिंह और दीपक सिंह ने बताया कि परवल की यह फसल उनके लिए दोहरी आमदनी का स्रोत थी. पहले इसके फल से अच्छी कमाई होती थी, और बाद में परवल की लत (बेल) से भी किसान हज़ारों-लाखों रुपये कमा लेते थे. लेकिन इस बार ओलावृष्टि और बारिश ने उनकी सारी मेहनत और उम्मीदों को तहस-नहस कर दिया. शेखपुरा जिले में रबी मौसम में लगायी गयी फसलों का रकबा प्रखंड गेहूं चना सरसों मक्का खेसारी तीसी अरियरी 4173.4 806.9 558.84 133.33 43.75 20.5 बरबीघा 4404.5 700.5 294.1 296.3 60.988 9.352 चेवाड़ा 4108.009 561.92 250.44 170.15 59.36 12.1 घाटकुसुम्भा- 1942 618 159 104.5 604 9 शेखोपुरसराय-2818.5 438 161.5 50.7 37 11.85 शेखपुरा 4858.2 1144.75 410.9 211.13 350.51 67.32

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Published by: Amlesh prasad

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