हजारों किलोमीटर उड़कर बिहारशरीफ पहुंचे साइबेरियन प्रवासी पक्षी, शहर के पेड़ों पर बढ़ी चहचहाहट

Biharsharif Siberian Birds : बिहारशरीफ इन दिनों साइबेरियन प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार है. शहर के कई पुराने और विशाल पेड़ों पर इन पक्षियों ने अपना बसेरा बना लिया है. जानकारों के अनुसार, ये पक्षी हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर यहाँ पहुंचते हैं.

Biharsharif Siberian Birds : बिहारशरीफ इन दिनों साइबेरियन प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार है. शहर के कई पुराने और विशाल पेड़ों पर इन पक्षियों ने अपना बसेरा बना लिया है. नालंदा महिला कॉलेज, नगर थाना परिसर, न्यायालय परिसर तथा अन्य स्थानों के पीपल, बरगद और छायादार पेड़ों पर सैकड़ों की संख्या में प्रवासी पक्षी देखे जा रहे हैं.

बिहारशरीफ के पेड़ों पर साइबेरियन पक्षियों ने बनाया बसेरा

इनके आगमन से शहरवासियों को प्रकृति का अनूठा नजारा देखने को मिल रहा है. जानकारों के अनुसार हर वर्ष मौसम परिवर्तन के साथ ये पक्षी हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा तय कर बिहारशरीफ समेत देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचते हैं.

Biharsharif Siberian Birds : हजारों किलोमीटर की उड़ान भरकर पहुंचते हैं ये पक्षी

जानकारी अनुसार, अत्यधिक ठंड वाले क्षेत्रों में तापमान शून्य से नीचे चले जाने के कारण इनके लिए जीवनयापन कठिन हो जाता है. ऐसे में अनुकूल वातावरण और भोजन की तलाश में ये पक्षी अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों की ओर पलायन करते हैं.

सफेद रंग और नारंगी चोंच से होती है पहचान

सफेद रंग के ये आकर्षक पक्षी अपनी नारंगी चोंच और पैरों के कारण आसानी से पहचाने जाते हैं. ये न केवल लंबी दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम होते हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर पानी में तैर भी सकते हैं. हालांकि लंबी यात्रा के दौरान तेज हवाओं, आंधी-तूफान और प्रतिकूल मौसम के कारण कई पक्षी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाते हैं.

पावापुरी, राजगीर और बिहारशरीफ में हर साल होता है आगमन

प्रवासी पक्षी उपयुक्त तापमान और अनुकूल पर्यावरण की तलाश में विभिन्न क्षेत्रों का रुख करते हैं. पावापुरी, राजगीर और बिहारशरीफ में वर्षों से इन पक्षियों का आगमन होता रहा है. उन्होंने कहा कि मानव समाज को इन पक्षियों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए आगे आना चाहिए ताकि प्राकृतिक जैव विविधता बनी रहे.

कुछ महीनों में वापस लौट जाएंगे पक्षी

स्थानीय लोगों के अनुसार इन पक्षियों के आने का सिलसिला अभी जारी है. आगामी कुछ महीनों तक ये पक्षी यहां रहेंगे और मौसम बदलने के साथ अपने मूल आवास की ओर वापस लौट जाएंगे.

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Author: Sunil kumar

Published by: Sakshi Kumari

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