Biharsharif fourlane: जिस फोरलेन से सफर को आसान, तेज और सुरक्षित बनाने का सपना दिखाया गया था, उसी सड़क पर पहली बारिश ने बदहाली की तस्वीर सामने ला दी है. जिला मुख्यालय बिहारशरीफ के बगल से गुजर रहे फोरलेन पर जगह-जगह गड्ढे, सड़क धंसने, पर्याप्त रोशनी नहीं होने और नालों के टूटे ढक्कनों ने वाहन चालकों की परेशानी बढ़ा दी है. स्थिति यह है कि सड़क पर चलने वाले वाहन चालक कब हादसे का शिकार हो जाएं, कहना मुश्किल है.
बीते शनिवार की शाम बिहारशरीफ बाइपास के समीप डीटीओ कार्यालय के पास राजगीर की ओर से आ रहे स्कूटी सवार निशांत कुमार के सामने चल रहे ट्रक की रफ्तार अचानक धीमी हो गयी. सड़क की स्थिति और सामने चल रहे वाहन को देखते हुए निशांत को अचानक संभलना पड़ा. गनीमत रही कि वह दुर्घटना का शिकार होने से बाल-बाल बच गये. स्थानीय लोगों के अनुसार करीब पांच दिन पहले तिरुपती मारबल के पास अखाड़ापर निवासी निवास कुमार के साथ भी इसी तरह की घटना हुई थी.
मंगलास्थान से चोराबगीचा तक कई जगह गड्ढे
बिहारशरीफ के मंगलास्थान से चोराबगीचा चौराहा तक फोरलेन के कई हिस्सों में जगह-जगह गड्ढे नजर आ रहे हैं. बारिश के बाद इनमें पानी जमा हो जाने से गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना और भी मुश्किल हो जाता है.
वाहन चालकों के अनुसार इन गड्ढों से गुजरने के दौरान बड़े वाहनों के शॉकर और अन्य पार्ट्स पर भी असर पड़ रहा है. वहीं, छोटे वाहन चालक अचानक ब्रेक लगाने या गड्ढे से बचने के प्रयास में असंतुलित हो जाते हैं.
शाम ढलते ही बढ़ जाता है हादसे का खतरा
फोरलेन के कुछ हिस्सों में ओवरब्रिज से पानी गिरने के कारण सड़क पर फिसलन की स्थिति भी बन रही है. शाम ढलने के बाद पर्याप्त रोशनी नहीं होने से गड्ढे और फिसलन वाहन चालकों के लिए और खतरनाक हो जाते हैं.
खासकर स्कूटी, बाइक और साइकिल चालकों के लिए रात में सड़क पर बने गड्ढों का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है. अचानक गड्ढा सामने आने पर वाहन का संतुलन बिगड़ने और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
खराब सड़क के कारण बढ़ने लगी जाम की समस्या
फोरलेन का उद्देश्य वाहनों की रफ्तार बढ़ाना और सफर को सुगम बनाना है, लेकिन सड़क की खराब स्थिति इसका उलटा असर दिखा रही है. गड्ढों वाले हिस्से में बड़े वाहन धीमी गति से गुजरते हैं. इसके पीछे चल रहे वाहनों की कतार लगने से कई जगह जाम की स्थिति बनने लगी है.
वाहन चालकों को अब तेज रफ्तार से गुजरने के बजाय गड्ढों से बचते हुए धीमी गति से सफर करना पड़ रहा है.
टूटे नाले के ढक्कन भी बने खतरा
सड़क की परेशानी केवल गड्ढों तक सीमित नहीं है. फोरलेन के किनारे बनाये गये नालों के ढक्कन भी कई स्थानों पर टूटे या क्षतिग्रस्त हैं. खुले और टूटे ढक्कनों के कारण पैदल चलने वालों के साथ-साथ दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी खतरा बना हुआ है.
स्थानीय निवासी संतोष कुमार, रंजन कुशवाहा आदि का कहना है कि सड़क, प्रकाश व्यवस्था, जल निकासी और नालों की स्थिति को एक साथ ठीक किये बिना फोरलेन को पूरी तरह सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता.
107 किमी का फोरलेन, करीब 3,500 करोड़ की परियोजना
बख्तियारपुर से रजौली तक बनने वाला फोरलेन करीब 107 किलोमीटर लंबा है और इसकी अनुमानित लागत करीब 3,500 करोड़ रुपये बतायी गयी है. यह मार्ग पटना, नालंदा और नवादा जिलों को आपस में जोड़ता है. परियोजना पूरी होने के बाद नवादा से पटना की दूरी तय करने में करीब 75 मिनट लगने की उम्मीद है.
परियोजना के लिए विभिन्न हिस्सों में जमीन अधिग्रहण भी किया गया है. उपलब्ध विवरण के अनुसार 26 गांवों की करीब 105.104 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण का प्रावधान है, जबकि कुल अधिग्रहित जमीन करीब 352.99 हेक्टेयर बतायी गयी है.
पांच फ्लाईओवर और तीन अंडरपास भी बने
फोरलेन परियोजना में यातायात को सुगम बनाने के लिए पांच फ्लाईओवर, 22 माइनर ब्रिज, 164 स्लैब कल्वर्ट, 74 पाइप कल्वर्ट और तीन अंडरपास बनाये गये हैं. लेकिन जिस सड़क से विकास की रफ्तार बढ़नी है, वही पहली बारिश में गड्ढों, जलजमाव और अंधेरे से जूझती नजर आ रही है.
