Bihar Sharif News : जिला मुख्यालय स्थित डीएम एवं एसपी कार्यालय से चंद कदम की दूरी पर नालंदा जिला गृह रक्षा वाहिनी का नया भवन छह वर्ष बाद भी अधूरा पड़ा है. वर्ष 2019 में भवन निर्माण का टेंडर हुआ था और 2020 तक निर्माण कार्य पूरा होना था लेकिन आज तक भवन का निर्माण पूरा नहीं हो सका है. इसके कारण अधिकारी और कर्मचारी अर्धनिर्मित भवन में बैठकर काम करने को विवश हैं.
अधूरे भवन में चल रहा सरकारी कार्यालय
जर्जर पुराने भवन से अर्धनिर्मित भवन में शिफ्ट हुआ कार्यालय पुराना खपड़ैल कार्यालय पूरी तरह जर्जर हो चुका है और उसकी छत व दीवारें गिरने की स्थिति में हैं. सुरक्षा कारणों से जिला गृह रक्षा वाहिनी कार्यालय को अर्धनिर्मित भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है. भवन में कई कमरों में दरवाजे तक नहीं लगे हैं. इसके बावजूद अधिकारी और कर्मचारी वहीं बैठकर सरकारी कार्यों का निष्पादन कर रहे हैं. करोड़ों की परियोजना अधूरी, निर्माण स्थल पर उग आए झाड़-जंगल करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से प्रशासनिक भवन, जी प्लस-टू कार्यालय, छह यूएस क्वार्टर और 29 एलएम आवासीय भवनों का निर्माण होना है लेकिन छह साल बाद भी दो भवनों की छत की ढलाई तक नहीं हो सकी है.
बारिश में खतरे में सरकारी अभिलेख
प्रशासनिक भवन प्लिंथ स्तर पर ही अटका हुआ है. कई निर्माणाधीन भवनों में झाड़-जंगल उग आने से परियोजना की धीमी रफ्तार साफ दिखाई देती है. बारिश में सरकारी अभिलेख बचाना बन जाता है चुनौती जिला गृह रक्षा वाहिनी के कंपनी कमांडर वष्टि कुमार विद्यार्थी ने बताया कि मजबूरी में अर्धनिर्मित भवन से कार्यालय चलाया जा रहा है. बारिश होने पर पानी भवन के अंदर पहुंच जाता है, जिससे सरकारी अभिलेख और उपकरण सुरक्षित रखना कठिन हो जाता है. कर्मचारी कुर्सी-टेबल लगाकर अस्थायी व्यवस्था में कार्य कर रहे हैं. मूलभूत सुविधाओं के अभाव में रोजमर्रा का कामकाज प्रभावित हो रहा है.
निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई नहीं
निर्माण एजेंसी पर कार्रवाई नहीं, जवानों को हो रही परेशानी कार्यालय में सात सिपाही, दो महिला सिपाही, एक चालक, एक कमांडेंट तथा एक कमांडेंट सहायक सहित कई कर्मी कार्यरत हैं, जबकि नौ होमगार्ड कंपनियां इससे संबद्ध हैं. पुलिस भवन निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि निर्माण एजेंसी की लापरवाही की शिकायत कई बार मुख्यालय को भेजी गई है. इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. नतीजतन अधिकारी, कर्मचारी और होमगार्ड जवान वर्षों से अधूरी व्यवस्था में काम करने को मजबूर हैं.
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