बिहारशरीफ के प्राचीन पुष्करणी तालाब को पर्यटन और आस्था केंद्र बनाने की मांग, पुरानी विरासत के संरक्षण के लिए ग्रामीण हुए एकजुट

Bihar Sharif News: नालंदा के पावाडीह पंचायत स्थित चण्डी मौ के ऐतिहासिक शुंगकालीन पुष्करणी तालाब के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की मांग जोर पकड़ने लगी है। ग्रामीणों ने अतिक्रमण हटाकर छठ घाट, पाथवे, प्रकाश व्यवस्था और पर्यटन सुविधाएं विकसित करने की मांग की है, ताकि यह धार्मिक आस्था और ग्रामीण पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सके.

नालंदा (बिहारशरीफ) से रामविलास की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : अनुमंडल के पावाडीह पंचायत के चण्डी मौ के शुंगकालीन पुष्करणी तालाब के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की मांग अब जोर पकड़ने लगी है. ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से इस प्राचीन धरोहर को संरक्षित कर इसे ग्रामीण पर्यटन एवं धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग की है. प्रो शिवेन्द्र नारायण सिंह, प्रशांत कुमार, जनार्दन सिंह एवं अन्य ग्रामीणों का कहना है कि इस पुष्करणी तालाब का निर्माण शुंगवंश के राजाओं ने कराया था. सदियों से यह तालाब ऐतिहासिक, पुरातात्विक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक रहा है.

बौद्ध और हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है पुष्करणी तालाब

बौद्ध धर्मावलंबियों के साथ-साथ हिंदू समाज के लिए भी यह स्थल गहरी आस्था का केंद्र है. आसपास के आठ गांवों के श्रद्धालु वर्षों से छठ महापर्व पर इसी तालाब में भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करते रहे हैं. पहले छठ का प्रसाद भी इसी तालाब के जल से तैयार किया जाता था. आज भी गांव के अधिकांश मांगलिक कार्यों की शुरुआत इसी पवित्र जल से करने की परंपरा कायम है. करीब 8.65 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस तालाब पर अतिक्रमण और उपेक्षा का खतरा मंडरा रहा है. तालाब की भूमि पर कई स्थानों पर अवैध कब्जा हो चुका है, जबकि गांव की नालियों का गंदा पानी सीधे इसमें गिरने से जल प्रदूषित हो गया है.

सौंदर्यीकरण से बढ़ेगा पर्यटन और धार्मिक महत्व

इससे तालाब का धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व लगातार प्रभावित हो रहा है. ग्रामीणों ने मांग की है कि तालाब के चारों ओर पाथवे, छठ घाट और पथवे का निर्माण कराया जाय, ताकि यह मॉर्निंग वॉक के साथ पर्यटन गतिविधियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सके. साथ ही पुराने स्वरूप के अनुरूप सीढ़ियों का पुनर्निर्माण, भींड पर पीसीसी, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, गार्डेनिंग, बैठने की सुविधा, हरित विकास तथा जल संरक्षण की स्थायी व्यवस्था की जाए.

प्राचीन पुष्करणी तालाब की मौजूदा हालत

अतिक्रमण हटाकर तालाब की मूल संरचना बहाल करने की मांग

नालियों के गंदे पानी को तत्काल रोकने और अतिक्रमण हटाकर तालाब की मूल संरचना बहाल करने की भी मांग उठाई गई है. ग्रामीणों का मानना है कि यदि इस ऐतिहासिक पुष्करणी तालाब का वैज्ञानिक ढंग से संरक्षण और सौंदर्यीकरण कराया जाए तो यह राजगीर क्षेत्र में ग्रामीण पर्यटन, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का नया आकर्षण बनकर स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति दे सकेगा.

Also Read : बेगूसराय में भीषण सड़क हादसा, दो स्कॉर्पियो की सीधी टक्कर में तीन दोस्तों की मौके पर ही मौत

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Yuvraj Ratan

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >