बिहार में आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के नए नियम से बढ़ी परेशानी, साइबर कैफे वसूल रहे अधिक शुल्क, 60% आवेदन रिजेक्ट

Bihar Sarif News: बिहार सरकार ने पांच मार्च से आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है. अब बिना आवश्यक दस्तावेज अपलोड किए गए आवेदन सीधे रद्द कर दिए जा रहे हैं.

बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Bihar Sarif News:
बिहारशरीफ में आय,जाति और निवास प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में नए नियम लागू होने के बाद आवेदकों की परेशानी बढ़ गई है. अब आवेदन के साथ कई दस्तावेजों की स्कैन कॉपी और पीडीएफ आरटीपीएस पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है. अतिरिक्त कार्यभार के कारण साइबर कैफे संचालकों ने आवेदन शुल्क 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया है, जबकि कई संचालक प्रमाण पत्र के लिए आवेदन लेने से भी इनकार कर रहे हैं.

दस्तावेज अपलोड नहीं करने पर आवेदन सीधे होगा अस्वीकार

बिहार सरकार ने पांच मार्च से आय, जाति और निवास प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है. अब बिना आवश्यक दस्तावेज अपलोड किए गए आवेदन सीधे रद्द कर दिए जा रहे हैं. निवास प्रमाण पत्र के लिए पहचान और पते का प्रमाण, आय प्रमाण पत्र के लिए आय संबंधी दस्तावेज तथा जाति प्रमाण पत्र के लिए खतियान और आवश्यक होने पर वंशावली जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है.

फर्जी प्रमाण पत्रों पर रोक के लिए सख्त हुई व्यवस्था

सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी प्रमाण पत्रों पर रोक लगाना और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है. जिन आवेदकों के पास भूमि या राजस्व संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें स्थल निरीक्षण का विकल्प दिया गया है. जांच पूरी होने के बाद ही संबंधित प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा.

50 से 60 प्रतिशत आवेदन हो रहे रिजेक्ट

साइबर कैफे संचालकों का कहना है कि पहले आधार कार्ड या पहचान पत्र के आधार पर आवेदन आसानी से हो जाता था. अब दस्तावेजों की कमी या त्रुटियों के कारण 50 से 60 प्रतिशत आवेदन अस्वीकृत हो रहे हैं. आवेदन रद्द होने के बाद आवेदक और संचालकों के बीच विवाद की स्थिति भी बन रही है.

वंशावली अनिवार्य होते ही अंचल कार्यालयों में उमड़ी भीड़

प्रमाण पत्रों के लिए वंशावली अनिवार्य किए जाने के बाद अंचल कार्यालयों और पंचायतों में लोगों की भीड़ बढ़ गई है. बड़ी संख्या में लोग पहले वंशावली बनवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं, जिससे कई स्थानों पर लंबी कतारें लग रही हैं. अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में वंशावली से जुड़े आवेदनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है.

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वंशावली बनाने की प्रक्रिया हुई आसान

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और पंचायती राज विभाग द्वारा किए गए बदलावों के बाद वंशावली बनवाना पहले की तुलना में आसान हो गया है. शपथ पत्र के आधार पर वंशावली तैयार की जा रही है और कई मामलों में एसडीओ या सीओ से सत्यापन की बाध्यता भी समाप्त कर दी गई है. नोटरी या ओथ कमिश्नर से सत्यापित शपथ पत्र को मान्य माना जा रहा है.

बेटियों और बहनों का नाम दर्ज करना अनिवार्य

नई व्यवस्था के तहत वंशावली में परिवार की बेटियों और बहनों का नाम दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है. भूमि सर्वे के लिए सादे कागज पर तैयार वंशावली भी स्वीकार की जा रही है. साथ ही मृत्यु प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त कर केवल संबंधित विवरण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है.

आवेदन में आई 20 से 22 प्रतिशत की गिरावट

हर वर्ष जनवरी से जून के बीच नौकरी, नामांकन और सरकारी योजनाओं के कारण प्रमाण पत्रों के आवेदनों में भारी वृद्धि होती है. हालांकि इस बार नए नियम लागू होने के बाद आवेदन संख्या में 20 से 22 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है. लोग पहले वंशावली और अन्य दस्तावेज जुटाने में समय लगा रहे हैं, जिससे आवेदन प्रक्रिया धीमी पड़ गई है.

बिहारशरीफ और इस्लामपुर में सबसे अधिक आवेदन

जिले में बिहारशरीफ, इस्लामपुर, हरनौत और एकंगरसराय ऐसे क्षेत्र हैं जहां आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र के सबसे अधिक आवेदन प्राप्त होते हैं. वहीं छोटे प्रखंडों में आवेदन संख्या अपेक्षाकृत कम रहती है. अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों की अनिवार्यता के कारण आरटीपीएस और सीएससी केंद्रों पर आवेदनों की गति प्रभावित हुई है.

अतिरिक्त खर्च और दस्तावेज जुटाने में लग रहा समय

नए नियमों के कारण आवेदकों को अतिरिक्त खर्च के साथ कई तरह के दस्तावेज जुटाने पड़ रहे हैं. कई लोगों को वंशावली, खतियान और अन्य कागजात तैयार कराने में सप्ताहों से लेकर महीनों तक का समय लग रहा है. इससे नौकरी, कॉलेज नामांकन और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए प्रमाण पत्र बनवाने वाले अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ गई है.

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By Sakshi Kumari

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वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति, प्रशासनिक गतिविधियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization) की भी समझ है, जिसके अनुरूप वह खबरों को इस प्रकार तैयार करती हैं कि वे पाठकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचें और खोज इंजन में बेहतर प्रदर्शन करें. ब्रेकिंग न्यूज की पहचान, उसकी त्वरित कवरेज और कम समय में सटीक समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यक्षमताओं में शामिल है.

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