राजगीर के ऐतिहासिक वैभारगिरी पर्वत पर स्थित भेलवाडोभ जलाशय के संरक्षण और इसकी जलधारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी पहल शुरू की है.
जिला पदाधिकारी (डीएम) उदिता सिंह ने संबंधित अधिकारियों के साथ जलाशय का स्थलीय निरीक्षण कर इसकी वर्तमान स्थिति का जायजा लिया तथा वर्षा जल संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.
निरीक्षण के दौरान डीएम ने वन विभाग के अधिकारी डीएफओ (DFO) राजकुमार एम को निर्देश दिया कि जलाशय को लगभग छह फीट और गहरा कराया जाए.
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्य का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल के अधिकतम संचयन की व्यवस्था सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में जल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो और जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस पर कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाए.
गर्मजल कुंडों और झरनों से है गहरा संबंध
मान्यताओं और विशेषज्ञों के अनुसार, भेलवाडोभ जलाशय वैभारगिरी पर्वत से आने वाले वर्षा जल का प्रमुख प्राकृतिक संचयन स्थल माना जाता है. इस जलाशय का सीधा संबंध ब्रह्मकुंड क्षेत्र के प्रसिद्ध गर्मजल कुंडों एवं प्राकृतिक झरनों से है. दशकों पहले जब इस जलाशय में पर्याप्त मात्रा में पानी रहता था, तब ब्रह्मकुंड क्षेत्र के गर्मजल स्रोतों की जलधारा भी काफी अधिक प्रबल और सतत बनी रहती थी.
लेकिन, पिछले कुछ वर्षों से जलाशय के सूखने और भूजल स्तर में लगातार गिरावट आने का असर सीधे तौर पर गर्मजल कुंडों पर भी साफ दिखाई देने लगा है.
स्थिति यह है कि हाल के वर्षों में कई कुंड समय-समय पर सूखते रहे हैं, और इस वर्ष तो एक साथ चार गर्मजल कुंडों के सूख जाने से श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों की चिंता काफी बढ़ गई है. इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस प्राचीन जलाशय के पुनर्जीवन को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है.
पर्यावरण और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण में मिलेगी मदद
जिला पदाधिकारी उदिता सिंह ने कहा कि जलाशय की भंडारण क्षमता बढ़ने से न केवल वर्षा जल का बेहतर संरक्षण संभव हो सकेगा, बल्कि इससे ब्रह्मकुंड क्षेत्र के भूजल स्तर को भी मजबूती मिलेगी.
इसके साथ ही यह पहल पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन और राजगीर की ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों को संजोए रखने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि इस कार्य के पूरा होने से भविष्य में गर्मजल कुंडों और झरनों के प्राकृतिक जल प्रवाह में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा.
