Biharsharif News : करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामलों में चर्चा में आए नीतीश कुमार उर्फ डब्लू से जुड़े पुराने आरोप एक बार फिर सुर्खियों में हैं. बेन थाना क्षेत्र के महेशपुर गांव से जुड़ा वर्ष 2012 का एक मामला फिर सामने आया है, जिसमें सरकारी योजना के तहत भैंस दिलाने का झांसा देकर एक भूमिहीन परिवार के नाम पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक से ऋण निकाले जाने का आरोप लगाया गया था.
भैंस दिलाने का झांसा देकर लिए गए दस्तावेज
महेशपुर गांव निवासी उमेश पासवान का आरोप है कि कई वर्ष पहले नीतीश कुमार उर्फ डब्लू उन्हें, उनकी पत्नी साबो देवी और पुत्र योगेंद्र पासवान को एसबीआई कृषि विकास शाखा, रामचंद्रपुर ले गया. वहां तीनों से फोटो, वोटर आईडी की प्रतियां और कई दस्तावेजों पर अंगूठे के निशान लिए गए. पीड़ित का आरोप है कि उन्हें बताया गया था कि सरकारी योजना के तहत भैंस उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनकी आजीविका में सुधार होगा. इस भरोसे पर परिवार ने सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए.
बैंक के नोटिस से हुआ कथित फर्जीवाड़े का खुलासा
उमेश पासवान के अनुसार, काफी समय तक भैंस नहीं मिलने के बाद उन्हें बैंक से ऋण चुकाने का नोटिस मिला. इसके बाद जानकारी मिली कि उनके, उनकी पत्नी और पुत्र के नाम पर पावर टिलर खरीदने के लिए एक-एक लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कर राशि की निकासी की जा चुकी थी. आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी भूमि रसीद और भूमि स्वामित्व प्रमाण-पत्र का उपयोग किया गया. उमेश का कहना है कि वह भूमिहीन मजदूर हैं और उनके पास खेती योग्य एक धुर जमीन भी नहीं है.
एफआईआर में कई लोगों को बनाया गया था आरोपी
पीड़ित ने 12 मई 2012 को बेन थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. प्राथमिकी में नीतीश कुमार उर्फ डब्लू सहित महेशपुर निवासी अजीत महतो, जामुन महतो, जयप्रकाश प्रसाद उर्फ कैलू प्रसाद, रोहतास जिले के गुंजाचक निवासी अशोक सिंह, हाजीपुर गांधी आश्रम निवासी मनोज कुमार, तत्कालीन राजस्व कर्मचारी मनोज कुमार तथा अन्य लोगों को नामजद किया गया था. प्राथमिकी में बैंक अधिकारियों और संबंधित एजेंसी संचालकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे.
दस्तावेजों की जांच पर उठे सवाल
पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि बैंक द्वारा ऋण स्वीकृत करने से पहले दस्तावेजों का समुचित सत्यापन किया गया होता तो कथित फर्जीवाड़ा संभव नहीं होता. उनका दावा है कि पावर टिलर ऋण के लिए आवश्यक भूमि होने की शर्त पूरी नहीं होने के बावजूद ऋण स्वीकृत कर दिया गया.
पुराने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग
परिवार ने मांग की है कि हाल में सामने आए कथित ठगी के मामलों के साथ वर्ष 2012 के इस मामले की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी की भूमिका पाई जाती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए.
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