कार्बाइड गन से पांच की चली गयी एक आंख की रोशनी

देशी जुगाड से बनाया गया कार्बाइड गन जानलेवा बन गया है. दीपावाली में कार्बाइड गन से पटाखा फोड़ने के चक्कर में कई लोगों को आंखों की रोशनी गंवानी पड़ गयी है.

बिहारशरीफ. देशी जुगाड से बनाया गया कार्बाइड गन जानलेवा बन गया है. दीपावाली में कार्बाइड गन से पटाखा फोड़ने के चक्कर में कई लोगों को आंखों की रोशनी गंवानी पड़ गयी है. दीवाली में कार्बाइड गन से पटाखा फोड़ने के क्रम में एक आंख की रोशनी गंवाने वाले पांच लोग खंदकपर स्थित कुमार नेत्रालय पहुंचे है. नेत्र सर्जन डॉब नीतीश कुमार ने बताया कि उक्त पांचों मरीज जिले के विभिन्न क्षेत्रों के रहने वाले हैं. आवाज और चमक का रोमांच देने वाली यह खतरनाक कार्बाइड गन की चपेट में आकर अस्पताल पहुंचे हैं. कई बच्चों की रेटिना फटने से स्थायी रूप से आंखों की रोशनी चली गई है, कई के चेहरे और आंखों के आसपास की त्वचा गंभीर रूप से झुलस गई है. उनका कहना है कि कैल्शियम कार्बाइड, प्लास्टिक पाइप और गैस लाइटर से बनी यह देसी गन दिखने में भले खिलौना है. इसके भीतर छिपा खतरनाक तत्व छिपा होता है. जैसे ही कार्बाइड पानी के संपर्क में आता है, यह एसिटिलीन गैस बनाता है, जो चिंगारी पड़ते ही विस्फोट कर जाती है. विस्फोट के दौरान प्लास्टिक पाइप के टूटे टुकड़े छर्रों की तरह शरीर में घुस जाते हैं और खासकर आंखों व चेहरे को गहरी चोट पहुंचाते हैं. उन्होंने कहा कि “कार्बाइड से बनने वाली एसिटिलीन गैस और टूटते पाइप के टुकड़े मिलकर होते है छोटे मगर बेहद घातक विस्फोट का कारण बनता है. इससे रेटिना फट सकती है, कॉर्निया जल व फट जाती है जिससे रोशनी आने की संभावना कम रहती है. ऐसी किसी भी घटना में तुरंत नेत्र विशेषज्ञ की जांच जरूरी है, वरना आंख की रोशनी बचाना मुश्किल हो जाता है डॉ.नीतीश ने अभिभावकों और प्रशासन दोनों से अपील की है कि बच्चों को इस खतरनाक खेल से दूर रखें. ऐसी दुर्घटना के बाद आंख पर दबाव न डालें, साफ कपड़े से हल्का ढकें और तुरंत अस्पताल पहुंचें.

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By SANTOSH KUMAR SINGH

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