Nalanda News: राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी से स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है. अस्पताल में उपाधीक्षक सहित कुल 147 पद स्वीकृत हैं, लेकिन महज 59 पदों पर ही कर्मी कार्यरत हैं. यानी 88 पद लंबे समय से रिक्त हैं. विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और कर्मचारियों के अभाव का सीधा असर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है.
विशेषज्ञ डॉक्टरों के कई पद खाली
अस्पताल में उपाधीक्षक समेत चिकित्सकों के 31 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 18 चिकित्सक पदस्थापित हैं. इनमें तीन चिकित्सकों के लंबे समय से अनुपस्थित रहने की बात भी अभिलेखों में दर्ज है. चर्म रोग विशेषज्ञ, पैथोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण विशेषज्ञों के पद रिक्त हैं. सामान्य शल्य चिकित्सक और फिजिशियन विशेषज्ञ के पदों पर भी स्वीकृत संख्या के मुकाबले कमी है.
अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष कुमार, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमजीत कुमार और डॉ. सन्नी कुमार, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वेश चंद्रा, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. स्वर्णिम स्वाति और डॉ. सुरभि सुमन समेत अन्य चिकित्सक पदस्थापित हैं. फिजिशियन के पद पर डॉ. रविशंकर और सामान्य शल्य चिकित्सक के पद पर डॉ. रिचा रानी कार्यरत हैं, जबकि एक पद रिक्त है.
33 साल से प्रभारी के भरोसे अस्पताल
अनुमंडलीय अस्पताल का दर्जा मिलने के बाद से ही उपाधीक्षक का पद रिक्त बताया जा रहा है. करीब 33 वर्षों से अस्पताल प्रभारी उपाधीक्षक के भरोसे संचालित हो रहा है. ऐसे में अस्पताल के प्रशासनिक और चिकित्सकीय कामकाज पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है.
उपलब्ध अभिलेख के अनुसार शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सोनू कुमार, फिजिशियन डॉ. रविशंकर और महिला सामान्य चिकित्सक डॉ. सुरभि शालिनी लंबे समय से अनुपस्थित हैं. डॉ. सुरभि शालिनी की अनुपस्थिति 4 दिसंबर 2025 से, जबकि डॉ. रविशंकर की अनुपस्थिति 14 मार्च 2022 से दर्ज बतायी गयी है.
जीएनएम के 50 में 29 पद रिक्त
नर्सिंग व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक है. प्रथम श्रेणी परिचारिका यानी जीएनएम के 50 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 21 कर्मी कार्यरत हैं. 29 पद खाली हैं. तकनीकी कर्मचारियों की कमी भी अस्पताल की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रही है.
एक्स-रे तकनीशियन के तीनों पद रिक्त हैं. प्रयोगशाला प्रावैधिकी के पांच पदों में दो पर कर्मी कार्यरत हैं, जबकि तीन पद खाली हैं. प्रयोगशाला सहायक के तीनों पद रिक्त हैं. फार्मासिस्ट के पांच स्वीकृत पदों में दो कर्मी कार्यरत हैं, जिनमें एक प्रतिनियोजन पर हैं.
कई सहायक पद भी वर्षों से खाली
ऑडियोमेट्रिशियन, पुरुष एवं महिला कक्ष सेवक, स्वीपर, माली, चालक, रसोइया, रात्रि प्रहरी, मेट्रोन और मेट्रोन सहायक, मेडिकल रिकॉर्ड तकनीशियन तथा प्लंबर समेत कई पदों पर स्वीकृत संख्या के अनुरूप कर्मी उपलब्ध नहीं हैं. कुछ कर्मियों के अन्य संस्थानों में प्रतिनियोजन पर होने की बात भी सामने आई है.
रिक्त पद भरने की उठी मांग
मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच सीमित मानव संसाधन के सहारे अस्पताल का संचालन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है. जदयू जिला उपाध्यक्ष सुवेंद्र राजवंशी, पूर्व प्रखंड प्रमुख सुधीर कुमार पटेल, जदयू नगर अध्यक्ष आशुतोष कुमार पांडेय, वार्ड पार्षद डॉ. अनिल कुमार, पप्पू कुमार सिंह, गोलू यादव समेत स्थानीय लोगों ने रिक्त पदों पर जल्द नियुक्ति की मांग की है. लोगों ने लंबे समय से अनुपस्थित कर्मियों के मामले में विभागीय स्तर पर कार्रवाई करने की भी मांग की है, ताकि अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा सके.
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