देश सेवा को समर्पित हुए 1340 नवारक्षी

शहर के सीआरपीएफ प्रशिक्षण केन्द्र में गुरुवार को 58वें बैच के 1340 नवारक्षियों का दीक्षांत परेड समारोह संपन्न हुआ.

By SANTOSH KUMAR SINGH | January 8, 2026 9:48 PM

प्रतिनिधि, राजगीर.

शहर के सीआरपीएफ प्रशिक्षण केन्द्र में गुरुवार को 58वें बैच के 1340 नवारक्षियों का दीक्षांत परेड समारोह संपन्न हुआ. अनुशासन, समर्पण और देशभक्ति से ओतप्रोत इस समारोह में नवारक्षियों ने आकर्षक पासिंग आउट परेड प्रस्तुत की। समारोह के मुख्य अतिथि सीआरपीएफ के दक्षिणी क्षेत्र के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) रविदीप सिंह शाही ने परेड का निरीक्षण किया तथा सलामी ली. परेड मैदान में कदमताल की गूंज और राष्ट्रसेवा के संकल्प ने उपस्थित जनसमूह को गौरवान्वित कर दिया. इस अवसर पर एडीजी रविदीप सिंह शाही ने कहा कि देश की आंतरिक और बाह्य सुरक्षा में सीआरपीएफ का इतिहास त्याग, तपस्या और बलिदान से परिपूर्ण रहा है. जवान ही किसी भी फोर्स की आन-बान-शान होते हैं. वही उसके ब्रांड एंबेसडर भी होते हैं. जवान अपने अधिकारियों के निर्देशों का पालन करते हुए 24 घंटे ड्यूटी पर तैनात रहते हैं. विषम से विषम परिस्थितियों में भी आम जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हैं. उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ ने समय-समय पर हर चुनौती का डटकर सामना किया है. एडीजी ने सीआरपीएफ में महिलाओं की भागीदारी का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1986 में पहली बार महिलाओं की कांस्टेबल पद पर भर्ती की गई, जबकि 1987 में सीआरपीएफ पहली ऐसी अर्धसैनिक बल बनी, जिसमें महिला अधिकारियों की भर्ती शुरू हुई. उन्होंने नक्सलवाद जैसी जटिल समस्या से निबटने और भटके हुए नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में लाने में सीआरपीएफ की भूमिका को ऐतिहासिक बताया. साथ ही पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान सीआरपीएफ की दो कंपनियों के द्वारा पाकिस्तानी ब्रिगेड को दो दिनों तक रोके रखने की वीरता का भी उल्लेख किया. संसद भवन से लेकर प्रधानमंत्री आवास तक की सुरक्षा तथा दंगों पर नियंत्रण में सीआरपीएफ की अधीनस्थ रैपिड एक्शन फोर्स की कार्यकुशलता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में इस बल की साख कायम है. उन्होंने नवारक्षियों से अनुशासन, ईमानदारी और निष्ठा के साथ कर्तव्य निर्वहन करने का आह्वान किया. इस अवसर पर पुलिस उप महानिरीक्षक सह प्राचार्य निखिल रस्तोगी ने कहा कि 58वें बैच के 1340 नवारक्षी देश के 24 राज्यों से चयनित हैं, जो ‘अनेकता में एकता’ का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करते हैं. उन्होंने बताया कि यह अबतक का सबसे बड़ा प्रशिक्षण बैच है, जिसने सीआरपीएफ कैंप, राजगीर के गौरवशाली इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है. उन्होंने जवानों को प्रेरित करते हुए कहा कि अनुशासन और संस्कार ही किसी भी देश और फोर्स को महान बनाते हैं, इसलिए कार्यक्षेत्र हो या अवकाश हर परिस्थिति में अनुशासन बनाए रखें. प्रशिक्षण अवधि के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नवारक्षियों को ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया. जीडी मोहित कुमार को सर्वोत्तम फायरर, जीडी बासुदेव भोई को सर्वोत्तम स्पोर्ट्समैन, जीडी ज्योतिरादित्य मंगोत्रा को सर्वोत्तम बी.ओ.ए.सी., जीडी मृत्युंजय कुमार को सर्वोत्तम ड्रिल इंस्ट्रक्टर तथा जीडी दिलीप कुमार को सर्वोत्तम पी.टी.आई का पुरस्कार मिला. समारोह में नवारक्षियों द्वारा शारीरिक प्रशिक्षण, निहत्थी लड़ाई, योग, एयरोबिक्स, कराटे और बाइक स्टंट जैसे रोमांचक प्रदर्शन किए गए. आग में कराटे टीम के द्वारा दहकते टाइल्स तोड़ने, योग टीम द्वारा मानव आकृतियों का निर्माण और बाइक स्टंट ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम में बिहार सेक्टर के आइजी राजकुमार, पटना रेंज के डीआइजी अच्युतानंद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे.

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