कांग्रेस को बिहार चुनाव के 3 महीने बाद भी नहीं मिला विधायक दल का नेता, मंडरा रहा टूट का खतरा?

Bihar Politics: बिहार में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अब तक विधायक दल का नेता तय नहीं कर सकी है. दिल्ली में राहुल गांधी की बैठकों और प्रदेश स्तर की कवायदों के बावजूद फैसला टलता जा रहा है, जिससे पार्टी की आंतरिक रणनीति और नेतृत्व प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है.

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा सवाल हर किसी की जुबान पर है. आखिर कांग्रेस अपने विधायक दल का नेता चुनने से क्यों हिचक रही है? विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तीन महीने से अधिक का समय बीत चुका है, एक शीतकालीन सत्र खत्म हो गया और बजट सत्र भी आधा बीत चला है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस अब तक ‘अध्यक्ष’ विहीन स्थिति में विधानसभा के भीतर संघर्ष कर रही है.

चर्चा तेज है कि पार्टी के भीतर एक बार फिर ‘टूट का डर’ इतना गहरा है कि आलाकमान किसी भी एक नाम पर मुहर लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है.

तीन महीने बाद भी नेता चयन अधर में

पार्टी के भीतर यह माना जा रहा है कि विधायकों के टूटने का डर ही इस देरी की सबसे बड़ी वजह है. इस दौरान एक शीतकालीन सत्र समाप्त हो चुका है और बजट सत्र भी आधा गुजर चुका है, फिर भी स्थिति जस की तस बनी हुई है.

23 जनवरी को राहुल गांधी ने दिल्ली में विधायकों से मुलाकात कर दूसरी पार्टी में न जाने का भरोसा लिया था. इसके बाद प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरू की मौजूदगी में सदाकत आश्रम में बैठक हुई, जहां विधायकों ने नेता चयन का अधिकार आलाकमान को सौंप दिया. उम्मीद थी कि जल्द घोषणा होगी, लेकिन इंतजार लंबा होता गया.

डिनर डिप्लोमेसी भी नहीं कर सकी कमाल

प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने पटना में होटल में विधायकों को डिनर पर बुलाकर सामंजस्य बनाए रखने की कोशिश की. वरिष्ठ विधायक मनोहर प्रसाद सिंह को समन्वय की जिम्मेदारी भी दी गई, लेकिन नेता चयन पर सहमति नहीं बन सकी.

पार्टी के छह विधायकों में से चार ही ऐसे हैं जिन पर विचार किया जा सकता है. स्वास्थ्य कारणों से अबिदुर रहमान इच्छुक नहीं हैं, जबकि कमरुल होदा की राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर हिचकिचाहट है. मनोहर प्रसाद सिंह वरिष्ठ हैं, लेकिन जातीय समीकरण उन्हें मजबूत विकल्प नहीं बनाते. ऐसे में अभिषेक रंजन, सुरेंद्र प्रसाद और मनोज विश्वास के नाम चर्चा में हैं, फिर भी सहमति दूर है.

फिर पटना पहुंच रहे प्रभारी

सोमवार को कृष्णा अल्लावरू के पटना दौरे के दौरान संगठन सृजन अभियान पर बैठक होगी. पार्टी नेतृत्व इसे संगठन मजबूत करने का अवसर मान रहा है, जबकि राजनीतिक हलकों में नजर विधायक दल नेता की घोषणा पर टिकी है.
प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम का दावा है कि सभी विधायक एकजुट हैं और जल्द ही नेता की घोषणा होगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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