Anant Singh News: बिहार के मोकामा में शुक्रवार को भव्य अंतरराष्ट्रीय महादंगल का आयोजन किया गया. यह दंगल जदयू विधायक अनंत सिंह द्वारा नदवां गांव में आयोजित किया गया. जो बाहुबली विवेका पहलवान की पुण्यतिथि के मौके पर रखा गया था. इस आयोजन में देश-विदेश के कुल 101 पहलवानों ने हिस्सा लिया और अपनी ताकत का प्रदर्शन किया.
देश-विदेश के पहलवानों के बीच रोमांचक मुकाबले
दंगल में कई शानदार मुकाबले देखने को मिले. भारतीय पहलवान ने ईरानी खिलाड़ी को तीन बार हराकर दर्शकों का दिल जीत लिया. वहीं जॉर्जिया के पहलवान ने दिल्ली के रोहित को मात दी. इसके अलावा, ईरान के पहलवान जलाल को महाराष्ट्र के खिलाड़ी शिवा ने हराकर मुकाबले को और रोमांचक बना दिया.
51 लाख रुपये के पुरस्कार बांटे गए
इस महादंगल में कुल 101 पहलवानों के बीच करीब 51 लाख रुपये की पुरस्कार राशि वितरित की गई. आयोजन का स्तर अंतरराष्ट्रीय होने के कारण इसमें बड़े स्तर के खिलाड़ियों ने भाग लिया.
अनंत सिंह की मौजूदगी बनी आकर्षण
दंगल देखने के लिए विधायक अनंत सिंह अपने छोटे बेटे अभिनव सिंह के साथ पहुंचे. उन्होंने सिर पर साफा बांध रखा था और अखाड़े के चारों ओर घूम-घूमकर मुकाबले का आनंद ले रहे थे. स्थानीय लोगों का कहना था कि कई लोग कुश्ती से ज्यादा अनंत सिंह को देखने के लिए पहुंचे थे.
गुंजन सिंह के गानों पर झूमे लोग
कार्यक्रम में भोजपुरी सिंगर गुंजन सिंह भी पहुंचे. उनके गानों पर अनंत सिंह समेत दर्शक झूम उठे. गुंजन सिंह के लोकप्रिय गीत ‘देखने में तुमको भले गंवार लगते हैं…’ पर लोगों ने गमछा लहराकर माहौल को और भी जोशीला बना दिया.
दंगल देखने के लिए करीब 10 हजार लोग मैदान में मौजूद रहे. बाहर से आए दर्शकों के लिए खाने-पीने की विशेष व्यवस्था भी की गई थी, जिससे आयोजन और भव्य बन गया.
जेल से बाहर आने के बाद पहला बड़ा आयोजन
यह आयोजन अनंत सिंह के लिए खास माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में उन्हें पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से रिहाई मिली है. जेल से बाहर आने के बाद यह उनका पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम है, जिस पर सभी की नजरें टिकी रहीं.
विवेका पहलवान को दी गई श्रद्धांजलि
यह महादंगल विवेका पहलवान (विवेक सिंह) की पुण्यतिथि पर आयोजित किया गया. वे ‘बिहार केसरी’ का खिताब जीत चुके थे और अपनी कड़ी मेहनत व अनुशासन के लिए जाने जाते थे. उनके भाई अरविंद पहलवान के अनुसार, विवेका रोजाना 5 लीटर दूध पीते थे, हजारों दंड-बैठक लगाते थे और करीब 10 किलोमीटर दौड़ते थे.
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