Bihar News: जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न छात्रों की गुंडागर्दी थमने का नाम नहीं ले रही है. ताजा मामला बेतिया के GMCH अस्पताल का है. यहां जूनियर डॉक्टर और इंटर्न ने अस्पताल के भीतर मरीज के परिजनों से जमकर मारपीट की है.
जानकारी के अनुसार, मरीज के परिजन पटना से उसे बेतिया ले गए थे, लेकिन रास्ते में मरीज की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टर ने मरीज का ऑक्सीजन मास्क हटा दिया, जिस पर परिजनों और डॉक्टर के बीच मामूली विवाद हुआ. इस विवाद के बाद जूनियर डॉक्टर और इंटर्न ने मरीज के परिजनों की पिटाई कर दी.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो
अब इस मारपीट का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जानकारी के अनुसार पटना से लौटते समय बेतिया क्रिश्चियन क्वार्टर की रहने वाली सुशीला कुमारी की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए बेतिया GMCH लाया गया.
इलाज के दौरान ऑक्सीजन मास्क हटाने को लेकर परिजनों और एक जूनियर डॉक्टर के बीच कहासुनी हुई. आरोप है कि इसके बाद जूनियर डॉक्टर ने अन्य जूनियर डॉक्टर्स और इंटर्न को बुला लिया.
जूनियर डॉक्टर्स और इंटर्न ने ऐसे की मारपीट
आरोपी जूनियर डॉक्टर के बुलावे पर आए अन्य जूनियर डॉक्टर्स और इंटर्न ने मरीज के परिजनों के साथ कहा सुनी शुरू की और गुस्से में तमतमाए इंटर्न और जूनियर डॉक्टर्स ने मारपीट शुरू कर दी. इस घटना में विशाल राज के पिता ज्ञान प्रकाश हिलेरियन और अमन ठाकुर पिता इग्नेशियुश हिलेरियन गंभीर रूप से घायल हो गए.
पहले भी कर चुके है गुंडागर्दी
इससे पहले भी जूनियर डॉक्टरों और इंटर्न अस्पताल परिसर के भीतर इलाज के लिए आए मरीजों और तीमारदारों के साथ मारपीट कर चुके है. कुछ दिनों पहले इन्होंने जीविका दीदियों के साथ भी मारपीट की थी. यह घटना भी काफी चर्चा में रही इसकी शिकायत भी दर्ज कराई गई. बावजूद इसके, जूनियर डॉक्टर्स और इंटर्न की गुंडागर्दी थमने का नाम नहीं ले रही है.
क्या ऐसे ही लात घूंसे खाते रहेंगे मरीज और उनके परिजन?
अब सवाल यह उठता है कि क्या मरीजों और उनके परिजनों को डॉक्टरों की गुंडागर्दी ऐसे ही झेलनी पड़ेगी? या प्रशासन की ओर से जूनियर डॉक्टर्स पर कोई कार्रवाई होगी? ताकि इलाज के लिए आए परिजनों को लात-घूंसे खाने पड़ें!
पटना के पीएमसीएच से लेकर बेतिया के जीएमसीएच तक अक्सर जूनियर डॉक्टर्स के साथ मारपीट की घटनाएं सामने आती रही है लेकिन प्रशासन और सरकार इस पर कोई ठोस कार्रवाई करने में नाकाम नजर आया है. ऐसी घटनाओं से जहां डॉक्टरों की छवि धूमिल होती है और मरीजों में भी असुरक्षा का भाव है.
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