Bihar News: बिहार में निजी वाहन को कॉमर्शियल बनाना हुआ आसान, जाने पूरी डिटेल्स
Bihar News: बिहार में अब निजी वाहन को कॉमर्शियल में बदलने की प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी तेज कर दी गई है. परिवहन विभाग के नए फैसले से न सिर्फ वाहन मालिकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी और सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी.
Bihar News: बिहार के गाड़ी मालिकों के लिए परिवहन विभाग ने एक ऐसी राहत दी है, जिसका इंतजार लंबे समय से किया जा रहा था. अब अपनी निजी कार को टैक्सी (कॉमर्शियल) में बदलना या किसी पुरानी कॉमर्शियल गाड़ी को अपने निजी उपयोग के लिए रजिस्टर्ड कराना पहले की तुलना में काफी सरल हो गया है.
परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने नई व्यवस्था का ऐलान करते हुए बताया कि अब फाइलें महीनों तक जिला पदाधिकारी (DM) के दफ्तर में नहीं भटकेंगी, बल्कि जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) को ही इसका अधिकार सौंप दिया गया है. इस फैसले से उन लोगों को बड़ी मदद मिलेगी जो अपनी गाड़ी का इस्तेमाल स्वरोजगार के लिए करना चाहते हैं.
अब डीटीओ दफ्तर में ही हो जाएगा सारा काम
परिवहन विभाग ने प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया है. पहले छोटी और हल्की कॉमर्शियल गाड़ियों को निजी श्रेणी में बदलने के लिए जिला पदाधिकारी की अनुमति अनिवार्य थी, जिसमें काफी समय लगता था. अब यह शक्ति डीटीओ को दी गई है.
डीटीओ अब गाड़ी मालिक की आर्थिक क्षमता और रखरखाव की योग्यता की जांच करेंगे और मानक पूरे होने पर तुरंत कन्वर्जन की अनुमति दे सकेंगे. मंत्री ने स्पष्ट किया कि कॉमर्शियल से निजी में बदलाव के लिए शर्त यह है कि गाड़ी कम से कम दो साल तक कॉमर्शियल उपयोग में रही हो और उस पर कोई भी पुराना टैक्स बकाया न हो.
फिट्नेस और टैक्स का गणित समझना है जरूरी
अगर आप अपनी निजी गाड़ी को कॉमर्शियल नंबर प्लेट पर ले जाना चाहते हैं, तो आपको दो महत्वपूर्ण चरणों से गुजरना होगा. सबसे पहले गाड़ी का नया फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा, ताकि सड़क सुरक्षा से कोई समझौता न हो। दूसरा महत्वपूर्ण पहलू टैक्स का अंतर है.
निजी और कॉमर्शियल वाहनों के टैक्स स्लैब अलग-अलग होते हैं. यदि कॉमर्शियल वाहन का टैक्स निजी वाहन से अधिक है, तो मालिक को वह अंतर राशि जमा करनी होगी. प्रक्रिया पूरी होते ही आपकी ‘वाइट प्लेट’ वाली गाड़ी ‘येलो प्लेट’ में तब्दील हो जाएगी, जिससे आप कानूनी रूप से उसका व्यावसायिक इस्तेमाल कर सकेंगे.
सरकारी विभागों के लिए भी जारी हुआ सख्त अल्टीमेटम
इस नई व्यवस्था के साथ ही सरकार ने उन विभागों पर भी शिकंजा कसा है जो निजी नंबर वाली गाड़ियों को किराए पर लेकर इस्तेमाल कर रहे थे. मंत्री श्रवण कुमार ने साफ कहा कि निजी गाड़ियों का कमर्शियल इस्तेमाल न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे सरकार के राजस्व को भी नुकसान होता है और यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है.
सभी सरकारी विभागों और निगमों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी गाड़ी को किराए पर लेते समय उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) जरूर जांचें. यदि वह गाड़ी कॉमर्शियल रजिस्टर्ड नहीं है, तो उसे किराए पर लेना अवैध माना जाएगा.
राजस्व और सुरक्षा का रखा गया है खास ख्याल
सरकार का यह कदम न केवल युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करेगा, बल्कि सड़क सुरक्षा मानकों को भी बेहतर बनाएगा. जब निजी गाड़ियां कॉमर्शियल में बदलेंगी, तो उनका नियमित फिटनेस टेस्ट होगा और वे बीमा के दायरे में आएंगी. इससे यात्रियों को भी सुरक्षा की गारंटी मिलेगी.
परिवहन विभाग का मानना है कि नियमों में इस ढील से लोग चोरी-छिपे निजी गाड़ियों का व्यावसायिक इस्तेमाल बंद करेंगे और कानूनी प्रक्रिया अपनाकर सरकार के खजाने में टैक्स जमा करेंगे. यह नई व्यवस्था बिहार में परिवहन क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित होगी.
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