बिहार के बाहर रहने वाले बिहारियों को नहीं होगी परेशानी, सरकार बनाएगी माइग्रेशन सपोर्ट सेंटर

Bihar News: बिहार सरकार ने प्रवासी श्रमिकों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. अब दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों में रह रहे बिहारियों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से दिलाने के लिए “माइग्रेशन सपोर्ट सेंटर” खोले जाएंगे. यह पहल श्रम संसाधन विभाग की ओर से की जा रही है, जिसका मकसद प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को जमीनी स्तर पर हल करना है.

Bihar News: बिहार सरकार अब अपने उन लाखों ‘परदेसी’ मजदूरों को उनके हाल पर नहीं छोड़ेगी, जो रोजगार के लिए दिल्ली, महाराष्ट्र या गुजरात जैसे राज्यों में रहते हैं. श्रम संसाधन विभाग ने इन राज्यों में ‘माइग्रेशन सपोर्ट सेंटर’ स्थापित करने का फैसला किया है.

यह सेंटर उन मजदूरों के लिए एक मजबूत ढाल का काम करेंगे, जिन्हें अक्सर अनजान शहरों में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने या पहचान साबित करने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं.

दस्तावेजों की झंझट खत्म

बिहार के श्रमिक जब दूसरे राज्यों में जाते हैं, तो उन्हें राशन कार्ड, गैस कनेक्शन या आधार कार्ड जैसे जरूरी कागजात बनवाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. नए माइग्रेशन सपोर्ट सेंटर इन सभी समस्याओं का ‘वन-स्टॉप सॉल्यूशन’ होंगे.

विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन केंद्रों पर श्रमिकों को न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी, बल्कि घर लेने, गैस कनेक्शन दिलाने और सरकारी पेपर बनवाने में मुफ्त सहायता भी प्रदान की जाएगी. सरकार का लक्ष्य दिसंबर 2026 तक उन सभी प्रमुख राज्यों में ये सेंटर खोल देने का है, जहां बिहारियों की तादाद सबसे ज्यादा है.

आपदा में बनेगा सहारा

इन सपोर्ट सेंटर्स के माध्यम से सरकार अब हर एक श्रमिक का पूरा ब्योरा (डेटाबेस) तैयार करेगी. इससे भविष्य में किसी भी आपदा के वक्त राहत सामग्री पहुंचाना या फंसे हुए लोगों को रेस्क्यू करना बेहद आसान हो जाएगा.

इन केंद्रों पर ऐसी व्यवस्था भी होगी जिससे श्रमिक जरूरत पड़ने पर अपने परिजनों से सीधा संपर्क कर सकेंगे. श्रम विभाग इसके लिए पीपीपी (PPP) मोड पर काम कर रहा है और कई राज्यों के श्रम अधिकारियों से पत्राचार भी शुरू हो चुका है.

इंडस्ट्री पार्टनर दिलाएंगे रोजगार की गारंटी

श्रम विभाग अब बड़े ‘इंडस्ट्री पार्टनर्स’ के साथ हाथ मिलाने जा रहा है. इन केंद्रों के जरिए स्किल्ड और अनस्किल्ड मजदूरों को उनकी योग्यता के अनुसार निजी क्षेत्रों में काम दिलाने में भी मदद की जाएगी.

इस फैसले से पंजाब, तमिलनाडु, हरियाणा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में रहने वाले लाखों बिहारियों को एक नई पहचान और सुरक्षा का अहसास मिलेगा.

कब तक बनेंगे माइग्रेशन सपोर्ट सेंटर?

श्रम संसाधन विभाग ने दिसंबर 2026 तक उन सभी प्रमुख राज्यों में माइग्रेशन सपोर्ट सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, जहां बिहारी प्रवासियों की संख्या अधिक है. संबंधित राज्यों के श्रम विभागों से समन्वय भी किया जा रहा है. इस पहल से लाखों बिहारी श्रमिकों को सीधा फायदा मिलेगा. .

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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