Bihar News: मुंबई की चकाचौंध छोड़ बिहार लौटा बड़ा उद्योग! महज 56 दिनों में खड़ी हुई फैक्ट्री,अब 7000 लोगों को घर के पास मिला रोजगार

Bihar News: जिस उद्योग को कभी मुंबई की पहचान माना जाता था, वही अब बिहार की धरती पर रोजगार की नई इबारत लिख रहा है. फाइलों की धीमी रफ्तार और वर्षों के इंतजार की छवि तोड़ते हुए, एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ने महज 56 दिनों में बिहार में न सिर्फ मंजूरी पाई, बल्कि हजारों लोगों के लिए काम भी खड़ा कर दिया.

Bihar News: मुंबई से बिहार शिफ्ट हुई इस इंडस्ट्रियल यूनिट ने यह साबित कर दिया है कि अगर नीति, नीयत और सिस्टम साथ हों, तो बिहार भी उद्योगों का भरोसेमंद ठिकाना बन सकता है.

आज इस यूनिट में 3200 सिलाई मशीनें लगातार चल रही हैं और 7000 से ज़्यादा लोगों को सीधे रोज़गार मिला है. खास बात यह है कि इनमें बड़ी संख्या उन कामगारों की है, जो सालों पहले रोजगार के लिए बिहार से बाहर गए थे.

56 दिन में तैयार हुआ पूरा सिस्टम

उद्यमी के मुताबिक, बिहार उद्योग विभाग से सभी ज़रूरी अनुमतियां सिर्फ 56 दिनों में मिल गईं. न लंबी प्रक्रिया, न दफ्तरों के चक्कर. यही तेजी इस फैसले की सबसे बड़ी वजह बनी. यूनिट से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मुंबई जैसे बड़े औद्योगिक शहरों में जहां वर्षों लग जाते हैं, बिहार में काम रिकॉर्ड समय में पूरा हो गया.

Plug & Play मॉडल ने बदली तस्वीर

बिहार सरकार का Plug & Play मॉडल इस बदलाव का अहम आधार बना. तैयार फैक्ट्री शेड, बिजली, पानी और आधारभूत सुविधाएं किफ़ायती दरों पर उपलब्ध कराई गईं. उद्यमी को सिर्फ मशीनें लानी थीं और उत्पादन शुरू हो गया. यही मॉडल अब दूसरे निवेशकों को भी आकर्षित कर रहा है.

पलायन नहीं, अब वापसी की कहानी

इस यूनिट ने पलायन की दिशा ही बदल दी. जो मजदूर महाराष्ट्र में 10–15 साल काम कर चुके थे, वे अब अपने गांव और शहर लौट आए हैं. वही हुनर, वही अनुभव, लेकिन अब अपने घर के पास रोजगार.

उद्योग विभाग का कहना है कि नीतियों को और सरल किया जा रहा है ताकि ऐसी और यूनिट्स बिहार आएं. संदेश साफ है—बिहार अब सिर्फ़ श्रमिक देने वाला राज्य नहीं, बल्कि उद्योग गढ़ने वाला राज्य बन रहा है.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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