Bihar News: बिहार की धरती अब स्वच्छ और हरित ऊर्जा का नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर है. राज्य सरकार ने ‘बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति’ के निर्माण की कवायद तेज कर दी है. ब्रेडा (बिहार नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी) इस नीति को अंतिम रूप देने में जुटा है, जिसके तहत उद्योग, गन्ना और कृषि जैसे प्रमुख विभागों से राय मांगी गई है.
इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में कार्बन उत्सर्जन को शून्य करना और बिहार को हरित ऊर्जा के वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करना है. जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा.
बिहार में बनेगी हाइड्रोजन नीति
बिहार सरकार स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए राज्य की पहली हाइड्रोजन नीति तैयार करने जा रही है. इस नीति का मसौदा तैयार करने की जिम्मेदारी ब्रेडा यानी बिहार नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी को दी गई है. नीति को अंतिम रूप देने से पहले उद्योग, कृषि, गन्ना उद्योग और अन्य विभागों से सुझाव लिए जा रहे हैं.
सरकार की योजना है कि सभी आवश्यक परामर्श के बाद इस नीति को कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा.
राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप राज्य की पहल
केंद्र सरकार के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत सभी राज्यों को अपनी हाइड्रोजन नीति बनाने को कहा गया है. इस मिशन का लक्ष्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना है. इसी दिशा में बिहार भी अपनी रणनीति तैयार कर रहा है.
प्रस्तावित नीति में वर्ष 2030 तक राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा जा सकता है. साथ ही उद्योगों को निवेश के लिए कर रियायतें और प्रोत्साहन देने की तैयारी है.
निवेशको मिलेगी टैक्स में भारी छूट
बिहार को निवेश का हब बनाने के लिए प्रस्तावित नीति में कई आकर्षक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं. नई परियोजनाओं को ‘श्वेत श्रेणी’ का दर्जा दिया जाएगा, जिसका मतलब है कि निवेशकों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे.
इसके अलावा, निवेशकों को जमीन रजिस्ट्री में स्टाम्प ड्यूटी से छूट, बिजली शुल्क में रियायत और 100 फीसदी तक एसजीएसटी प्रतिपूर्ति (SGST Reimbursement) देने की योजना है. ब्रेडा एक ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ के रूप में काम करेगी, जिससे परियोजनाओं को पलक झपकते मंजूरी मिल सकेगी.
महाराष्ट्र और यूपी की तर्ज पर बिहार भी बनेगा पावरहाउस
देश में महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने पहले ही अपनी हाइड्रोजन पॉलिसी लागू कर दी है. अब बिहार भी उसी कतार में शामिल होने जा रहा है जहां जीवाश्म ईंधन (पेट्रोल-डीजल) पर निर्भरता खत्म की जाएगी.
इस नीति के लागू होने से न केवल नए उद्योगों का रास्ता साफ होगा, बल्कि तकनीकी क्षेत्र में हजारों रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे. बिहार की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रदूषण मुक्त और आर्थिक रूप से संपन्न भविष्य की नींव रखेगी.
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