Bihar News: सरकारी स्कूलों का बदला चेहरा,अब बेटियां बनेंगी मास्टर ट्रेनर, कराटे के साथ क्लासरूम में गूंजेगा संगीत

Bihar News: बिहार के सरकारी स्कूलों की तस्वीर अब पूरी तरह बदलने वाली है. अब यहां की बेटियां न केवल किताबों से ज्ञान लेंगी, बल्कि मार्शल आर्ट के दांव-पेच सीखकर अपनी सुरक्षा खुद करेंगी. इतना ही नहीं, स्कूलों में अब रिकॉर्डेड गानों के बजाय बच्चे खुद वाद्य यंत्रों की थाप पर संगीत सीखेंगे.

Bihar News: बिहार के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ अब आत्मरक्षा और कला को भी मजबूत आधार दिया जा रहा है. पटना जिले में जहां छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कराटे और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जा रही है, वहीं मसौढ़ी के स्कूलों में संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने की नई पहल शुरू हुई है. इन दोनों योजनाओं का मकसद बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ आत्मविश्वास बढ़ाना है.

छात्राएं ही बनेंगी छात्राओं की ट्रेनर

पटना जिले के सरकारी स्कूलों में अब छात्राओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी दूसरी छात्राओं को सौंपी गई है. ये वे छात्राएं हैं, जिन्हें मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा चुका है. ऐसी छात्राएं अपने स्कूल के साथ-साथ प्रखंड के अन्य सरकारी स्कूलों में भी सप्ताह में एक दिन कराटे और आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देंगी. जिन स्कूलों में मास्टर ट्रेनर उपलब्ध हैं, वहां प्रधानाध्यापक अपनी सुविधा के अनुसार ट्रेनिंग का दिन और समय तय करेंगे.

321 मास्टर ट्रेनर, आगे और बढ़ेगा दायरा

अब तक पटना जिले के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जा चुकी है, जिनमें से 321 छात्राएं मास्टर ट्रेनर बन चुकी हैं. दूसरे चरण में इन विद्यालयों की अन्य छात्राओं को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है. योजना का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक छात्राएं आत्मरक्षा में दक्ष हों और जरूरत पड़ने पर खुद का बचाव कर सकें.

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के बाद अब हाई स्कूलों की छात्राओं को भी इस दायरे में लाया गया है. बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण योजना के तहत पटना जिले के 325 हाई स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दी जा रही है. यह प्रशिक्षण कुल 36 दिनों का होगा और हर सत्र दो घंटे का रहेगा.

सफेद से ब्लैक बेल्ट तक का सफर

नए शैक्षणिक सत्र से छात्राओं को मार्शल आर्ट के विभिन्न स्तरों के अनुसार बेल्ट भी दिए जाएंगे. शुरुआत सफेद बेल्ट से होगी और सभी चरण पूरे करने के बाद छात्राएं ब्लैक बेल्ट हासिल करेंगी. पीला, नारंगी, हरा, नीला और भूरा बेल्ट भी प्रशिक्षण के अलग-अलग स्तर पर प्रदान किए जाएंगे. पहले चरण में 1300 छात्राओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है, जबकि आगे चलकर करीब 15 हजार छात्राओं को ट्रेनिंग दी जाएगी.

मसौढ़ी के स्कूलों में गूंजेगा संगीत

मसौढ़ी प्रखंड के सरकारी स्कूलों में संगीत शिक्षा को लेकर नई शुरुआत की गई है. अब रिकॉर्डेड गानों के बजाय बच्चे खुद वाद्य यंत्र बजाकर चेतना सत्र में भाग लेंगे. इसके लिए प्राइमरी, मिडिल और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में म्यूजिक डेस्क बनाए जा रहे हैं.

बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से स्कूलों को वाद्य यंत्र खरीदने के लिए राशि उपलब्ध कराई गई है. इसके तहत प्रत्येक विद्यालय को हारमोनियम, तबला, नाल, कैसियो, टफली, झाल, मंजिरा, वासुरी और घुंघरू सेट दिए गए हैं. बच्चों को गाना गाने के साथ-साथ इन वाद्य यंत्रों को बजाने की भी ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें पारंपरिक गीतों और बिहारी लोक संगीत पर खास जोर रहेगा.

शिक्षा से आगे आत्मविश्वास की तैयारी

शिक्षा विभाग का मानना है कि आत्मरक्षा और संगीत जैसी गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाती हैं. इन पहलों से छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और बच्चे अपनी प्रतिभा को पहचान सकेंगे. सरकारी स्कूलों में यह बदलाव शिक्षा को सिर्फ परीक्षा तक सीमित न रखकर जीवन कौशल से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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