तेजप्रताप यादव ने खेली कुर्ता फाड़ अंदाज में होली,पार्टी दफ्तर में दिखा रंगों का जश्न

Bihar Holi : तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर अपने चिर-परिचित अंदाज से होली को यादगार बना दिया. पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ रंगों का ऐसा जश्न मना कि उत्साह में उनका कुर्ता तक फाड़ दिया गया. सियासत के बीच यह रंगीन लम्हा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

Bihar Holi : बिहार की राजनीति के सबसे अनूठे और रंगीन किरदार तेज प्रताप यादव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सादगी और भक्ति के साथ-साथ हुड़दंग वाली ‘देसी होली’ में उनका कोई सानी नहीं है. साल 2026 की फागुनी बयार में जहां एक ओर छोटे भाई तेजस्वी यादव नन्हीं बेटी के साथ रिश्तों के रंग बिखेर रहे थे.

वहीं बड़े भाई और जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने अपने समर्थकों के साथ ‘कुर्ता फाड़’ होली खेलकर राजधानी पटना का सियासी पारा बढ़ा दिया. लालू प्रसाद यादव के दौर की वह पारंपरिक होली, जिसकी धमक वर्षों से फीकी पड़ गई थी, तेज प्रताप के पार्टी कार्यालय में फिर से जीवंत हो उठी.

समर्थकों का जोश और फटे कुर्ते की सियासत

तेज प्रताप यादव जब अपने चिर-परिचित अंदाज में बाहर निकले, तो कार्यकर्ताओं का उत्साह सातवें आसमान पर था. होली की मस्ती ऐसी चढ़ी कि देखते ही देखते ‘भइया’ का कुर्ता भी फाड़ दिया गया, जो लालू परिवार की पुरानी परंपरा का हिस्सा माना जाता रहा है.

ढोल-मजीरों की थाप और अबीर के गुलाल के बीच तेज प्रताप खुद भी झूमते नजर आए. उन्होंने न केवल समर्थकों को गले लगाया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि होली का मतलब ही आपसी वैर-भाव को भूलकर एक हो जाना है. पटना की सड़कों पर इस नज़ारे को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा.

मस्ती के बीच ‘विश्व शांति’ का संदेश: यूक्रेन-रूस पर चिंता

हैरानी की बात यह रही कि जहां चारों ओर रंगों का शोर था, वहीं तेज प्रताप यादव ने एक गंभीर वैश्विक मुद्दे पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए दुनिया में चल रहे युद्ध जैसे हालातों पर गहरी चिंता जताई.

उन्होंने कहा, “होली प्रेम का प्रतीक है और मैं प्रार्थना करता हूं कि दुनिया में जहां भी जंग छिड़ी है, वहां जल्द शांति स्थापित हो. ” एक तरफ उनकी मस्ती भरी ‘कुर्ता फाड़’ होली और दूसरी तरफ विश्व शांति की अपील- तेज प्रताप का यह मिला-जुला अंदाज सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोर रहा है.

लालू परिवार की होली

इस साल की होली ने लालू परिवार के भीतर की एकता और अलग-अलग शैलियों को बखूबी दर्शाया है. जहां तेजस्वी की होली में एक ‘फैमिली मैन’ की छवि दिखी, वहीं तेज प्रताप ने अपने पिता की विरासत यानी ‘जनता की होली’ को जिंदा रखा.

फागुन की इस रूह में सादगी, मोहब्बत और थोड़ी सी ठिठोली ने बिहार की जनता को यह पैगाम दिया कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन जड़ों से जुड़ाव ही असली ताकत है. समर्थकों के लिए यह सिर्फ एक त्यौहार नहीं, बल्कि अपने नेता के सबसे करीब आने का एक सुनहरा लम्हा बन गया.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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