Bihar GIS Property Tax Survey: बिहार सरकार ने राज्य के 264 नगर निकायों में संपत्ति कर व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी बनाने का फैसला लिया है. इसके लिए शहरी विकास एवं आवास विभाग GIS (Geographic Information System) आधारित प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर तैयार कराएगा. इस नई व्यवस्था का मकसद आधुनिक तकनीक की मदद से टैक्स सिस्टम को मजबूत बनाना और राजस्व बढ़ाना है.
निजी एजेंसी करेगी घर-घर सर्वे
इस परियोजना के लिए शहरी विकास एवं आवास विभाग एक निजी एजेंसी का चयन करेगा. चयनित एजेंसी सभी मकानों और अन्य संपत्तियों का घर-घर जाकर GIS आधारित सर्वे करेगी. सर्वे के दौरान हर संपत्ति की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी, ताकि सही और अपडेट रिकॉर्ड तैयार किया जा सके.
सर्वे के दौरान हर मकान और संपत्ति का डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा. इसके साथ संपत्ति से जुड़ी जरूरी जानकारियां भी दर्ज की जाएंगी. बाद में इन आंकड़ों का विभाग और संबंधित नगर निकायों के मौजूदा रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा. इसके आधार पर नया और पूरी तरह अपडेट प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर तैयार होगा.
टैक्स से बाहर संपत्तियों की भी होगी पहचान
GIS आधारित सर्वे से उन संपत्तियों की भी पहचान हो जाएगी, जो अभी तक संपत्ति कर के दायरे में नहीं आई हैं. इससे टैक्स तय करने की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी. सरकार का मानना है कि इससे टैक्स वसूली बेहतर होगी और नगर निकायों की आय में भी बढ़ोतरी होगी.
डिजिटल और GIS आधारित रिकॉर्ड बनने के बाद संपत्ति कर से जुड़े विवाद कम होने की उम्मीद है. हर संपत्ति का सही रिकॉर्ड उपलब्ध होने से किसी तरह की गलतफहमी की संभावना भी कम होगी. इससे नगर निकायों के साथ-साथ करदाताओं को भी सुविधा मिलेगी और पूरी टैक्स व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी.
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चयनित एजेंसी देगी तकनीकी मदद
परियोजना के तहत चुनी गई एजेंसी नगर निकायों को तकनीकी सहयोग भी देगी. विभाग ने इस काम को फेजवाइज तरीके से पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है. एजेंसी का चयन होने के बाद सभी 264 नगर निकायों में सर्वे शुरू होगा. परियोजना पूरी होने पर संपत्ति कर से जुड़े सभी रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल और GIS आधारित हो जाएंगे.
