बिहार में खेती करने वाले किसानों के लिए जरूरी खबर है. अगर आप ट्रैक्टर, रोटावेटर या खेती में काम आने वाली कोई दूसरी मशीन खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए सरकार की कृषि यंत्रीकरण योजना काम की हो सकती है. इस योजना के तहत अलग-अलग कृषि यंत्रों (खेती-किसानी के औजारों और मशीनों) की खरीद पर अनुदान दिया जा रहा है. साल 2026-27 के लिए आवेदन शुरू हो चुके हैं और किसान 30 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं.
86 तरह के कृषि यंत्रों पर मिलेगा अनुदान
- बिहार में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अलग-अलग कृषि यंत्रों की खरीद पर सरकार की ओर से अनुदान दिया जा रहा है.
- जानकारी के मुताबिक करीब 86 तरह के कृषि यंत्र इस योजना के दायरे में हैं. अलग-अलग मशीनों के लिए अनुदान की दर और अधिकतम सीमा अलग है.
- इसका मतलब हुआ कि किसान को ट्रैक्टर या किसी दूसरी मशीन की पूरी कीमत खुद नहीं चुकानी पड़ सकती है, लेकिन कितनी मदद मिलेगी, यह मशीन, किसान की श्रेणी और सरकार की तय सीमा पर निर्भर करेगा.
कस्टम हायरिंग सेंटर पर 4 लाख तक की मदद
- अगर कोई प्रगतिशील किसान या पात्र समूह खेती के लिए मशीन किराये पर उपलब्ध कराने वाला कस्टम हायरिंग सेंटर शुरू करना चाहता है, तो उसे 40 प्रतिशत तक अनुदान, अधिकतम 4 लाख रुपये मिल सकता है.
- वहीं फार्म मशीनरी बैंक के लिए अनुदान की दर 80 प्रतिशत तक है और इसकी अधिकतम सीमा 8 लाख रुपये रखी गई है. इन सुविधाओं का मकसद किसानों को महंगी मशीनें खरीदने के बजाय जरूरत के हिसाब से किराये पर उपलब्ध कराना भी है.
कस्टम हायरिंग सेंटर यानी कि खेती की मशीन बैंक या ट्रैक्टर-औजार रेंटल की वो दुकान, जहां से छोटे और गरीब किसान अपनी खेती के लिए महंगे ट्रैक्टर, रोटावेटर, थ्रेशर, सीड ड्रिल और कंबाइन हार्वेस्टर जैसी आधुनिक मशीनें सस्ते किराए पर घंटे या एकड़ के हिसाब से लेते हैं.
स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर पर कितनी रकम?
- स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए भी सरकार ने अलग प्रावधान किया है. इसमें ट्रैक्टर पर 40 प्रतिशत तक अनुदान, अधिकतम 3.40 लाख रुपये दिया जा सकता है.
- वहीं ट्रैक्टर के अलावा बाकी मशीनों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है. इस पूरी श्रेणी में अधिकतम अनुदान 12 लाख रुपये तक हो सकता है.
- यानी 12 लाख रुपये की सीमा को सीधे किसी एक किसान के ट्रैक्टर की सब्सिडी न समझें. यह स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए तय अधिकतम सीमा है.
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किसान ड्रोन के लिए 5 लाख रुपये तक की सहायता
कृषि क्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए किसान ड्रोन सेंटर के लिए 5 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान बताया गया है. हालांकि 2026-27 में किसान ड्रोन से जुड़ी आवेदन अवधि अलग है और आधिकारिक पोर्टल पर इसकी आवेदन अवधि समाप्त दिखाई गई है. इसलिए इसे वर्तमान खुले आवेदन के साथ जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
ट्रैक्टर खरीदने पर कितनी सब्सिडी मिलेगी?
- यही सवाल ज्यादातर किसानों के मन में है. यहां एक बात समझना जरूरी है कि ट्रैक्टर के लिए सभी किसानों को एक जैसी सब्सिडी नहीं मिलेगी. अनुदान की रकम संबंधित कृषि यंत्र की निर्धारित कीमत, लागू अनुदान प्रतिशत, किसान की श्रेणी और सरकार की तय अधिकतम सीमा के आधार पर तय होगी.
- इसे एक आसान उदाहरण से समझिए. मान लीजिए किसी ट्रैक्टर की कीमत 5 लाख रुपये है और सरकारी नियमों के हिसाब से उस ट्रैक्टर पर पात्र किसान को 40 प्रतिशत अनुदान मिलता है. इस स्थिति में 5 लाख रुपये का 40 प्रतिशत यानी 2 लाख रुपये अनुदान बनता है. ऐसे में किसान को बाकी 3 लाख रुपये अपनी तरफ से देने होंगे.
- लेकिन अगर सरकार ने उस कृषि यंत्र के लिए अधिकतम अनुदान की सीमा 1.50 लाख रुपये तय की है, तो 40 प्रतिशत की गणना 2 लाख रुपये होने के बावजूद किसान को अधिकतम 1.50 लाख रुपये ही मिलेंगे. इसलिए सब्सिडी की गणना सिर्फ ट्रैक्टर की बाजार कीमत से नहीं होती.
30 सितंबर तक आवेदन का है मौका
अगर आप बिहार के किसान हैं और कृषि यंत्र खरीदने या पात्र मशीनरी केंद्र शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो 30 सितंबर 2026 की तारीख जरूर याद रखें. इस योजना के तहत व्यक्तिगत किसान कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा कस्टम हायरिंग सेंटर, फार्म मशीनरी बैंक और स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर से जुड़े आवेदनों के लिए भी आवेदन की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 है.
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