बिहार चुनाव 2020 : तेजस्वी के बजाय अब भी नीतीश के अनुभव को ही वरीयता देंगे वोटर, जदयू नेता का दावा

Bihar Assembly Election 2020 News Latest Update In Hindi बिहार जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा है कि मतदाताओं के एक वर्ग में यह भावना हो सकती है कि 15 साल शासन करने के बाद नीतीश कुमार थक चुके हैं, लेकिन राज्य के लोग बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए मतदान के दौरान महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव के बजाय अब भी उनके (नीतीश के) अनुभव को ही वरीयता देंगे.

Bihar Assembly Election 2020 News Latest Update In Hindi बिहार जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा है कि मतदाताओं के एक वर्ग में यह भावना हो सकती है कि 15 साल शासन करने के बाद नीतीश कुमार थक चुके हैं, लेकिन राज्य के लोग बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के लिए मतदान के दौरान महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव के बजाय अब भी उनके (नीतीश के) अनुभव को ही वरीयता देंगे.

अशोक चौधरी ने कहा कि नीतीश का ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ बेदाग रहा है और इसलिए भी राज्य के लोग उन्हें फिर से चुनेंगे. नीतीश के विश्वासपात्र और पार्टी के दलित चेहरों में शामिल चौधरी ने पीटीआई-भाषा से बातचीत के दौरान कहा कि नीतीश के खिलाफ बोलने के बाद लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल नहीं किया जाएगा.

बिहार के भवन निर्माण मंत्री चौधरी ने मुख्यमंत्री के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर के कारण के बारे में बात करते हुए कहा, “विपक्ष यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहा है कि वह (नीतीश) वृद्ध हो गये हैं, लेकिन उन्होंने हर क्षेत्र में, चाहे वह आधारभूत संरचना, स्वास्थ्य, या शिक्षा हो, सभी क्षेत्र में काम किया है. लोग खुश हैं. उन्हें (जनता) यह भी याद है कि आरजेडी के 15 साल के शासन में लालू प्रसाद ने क्या किया.”

नीतीश कुमार के थक चुके होने के विपक्ष के आरोप के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा, “ऐसा हो सकता है कि कुछ लोग सोच सकते हैं कि नीतीश जी को सत्ता में रहे 15 साल हो गए हैं. लेकिन, वे लोग (जनता) उनके स्थान पर तेजस्वी को नहीं लाएंगे. वह (नीतीश) अनुभवी हैं. केंद्रीय मंत्री के रूप में पहले और फिर मुख्यमंत्री के रूप में उन पर कोई आरोप नहीं लगा है. वह बेदाग हैं.”

अशोक चौधरी ने प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उसके शासन में 1990-2005 के दौरान 118 से अधिक ‘नरसंहार’ हुए थे और जातिगत आधार पर हिंसा की घटनाएं होती थी. उन्होंने तेजस्वी यादव के 10 लाख रोजगार देने के वादे का जिक्र करते हुए कहा कि अगर राजद के नेतृत्व वाले गठबंधन को वोट दिया जाता है, तो वह इस वादे को कैसे पूरा करेंगे क्योंकि इसके लिए पैसा कहां से आएगा.

जदयू नेता ने कहा कि राजद ने अपने 15 साल के शासन के दौरान केवल 95,000 नौकरियां ही प्रदान की थीं, जबकि नीतीश कुमार सरकार ने अब तक छह लाख से अधिक नौकरियों का सृजन किया है. इस चुनाव में जदयू को भाजपा की तुलना में कम सीट आने की परिस्थिति में मुख्यमंत्री पद को लेकर राजग के भीतर खींचतान होने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर चौधरी ने कहा कि उनकी पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरेगी और बिहार विधानसभा की 243 सीटों में गठबंधन को लगभग दो-तिहाई बहुमत मिलेगा.

अशोक चौधरी ने जदयू के अपने वोट बैंक अति पिछड़ा, महादलित समुदाय और महिलाओं पर मजबूत पकड़ होने का दावा करते हुए कहा कि इससे पार्टी को चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी बिहार में राजग में लोजपा (LJP) की वापसी के किसी भी प्रस्ताव का विरोध करेगी.

जदयू के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा, ‘मुझे ऐसा नहीं लगता. नीतीश कुमार के खिलाफ उन्होंने (लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान) जो कुछ कहा है, उसके बाद यह कैसे संभव है?’ जदयू नेता ने कहा कि पासवान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना और नीतीश पर प्रहार, राजनीति में अपना स्थान बनाने के उद्देश्य से करते हैं.

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