विजय सिन्हा से देवेश कुमार तक, बिहार में भूमिहार नेताओं को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

Bhumihar Brahmin Controversy: बिहार में देवेश कुमार के एमएलसी पद छोड़ने के बाद भूमिहार ब्राह्मण समाज की नाराजगी की चर्चा तेज हो गई है. बीजेपी और एनडीए सरकार पर इस समाज की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं. साथ ही पुराने फैसलों और चुनावी असर को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं.

Bhumihar Brahmin Controversy: बिहार में देवेश कुमार के एमएलसी पद से अचानक इस्तीफा देने के बाद नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है. आरोप लगाए जा रहे हैं कि बिहार की एनडीए सरकार भूमिहार ब्राह्मण समाज के साथ बराबरी का व्यवहार नहीं कर रही है.

सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या इस समाज के नेताओं को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है. चर्चा है कि उपेन्द्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश का मंत्री पद बचाने के लिए भाजपा ने भूमिहार समाज से आने वाले देवेश कुमार की राजनीतिक कुर्बानी दी.

क्या बीजेपी की रणनीति से बाहर हो रहा है भूमिहार समाज?

राजनितिक जानकारों की मानें तो अब ऐसा लगने लगा है कि भाजपा की भविष्य की रणनीति में भूमिहार ब्राह्मण समाज की पहले जैसी जगह नहीं बची है. उनका सवाल है कि क्या अब पार्टी को इस समाज की जरूरत नहीं रही. इस मुद्दे पर नाराज एक भाजपा नेता ने कहा कि पार्टी आग से खेलने जैसा काम कर रही है.

उनका कहना है कि भाजपा आज जिस जगह पर पहुंची है, उसमें भूमिहार समाज का बड़ा योगदान रहा है. उन्होंने कहा कि जब पार्टी मुश्किल दौर में थी, तब इसी समाज के लोगों ने संघर्ष किया था. ऐसे में अगर इस समाज की अनदेखी होगी तो इसका नुकसान पार्टी को ही उठाना पड़ सकता है.

विजय सिन्हा के पुराने आदेश को बदला गया

25 दिसंबर 2025 को उस समय के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय सिन्हा ने कहा था कि जमीन से जुड़े दस्तावेजों के जाति कॉलम में भूमिहार ब्राह्मण लिखा जाएगा. उन्होंने इस संबंध में प्रधान सचिव को सामान्य प्रशासन विभाग से मंजूरी लेने का निर्देश भी दिया था. अब सरकार के मौजूदा रुख को उनके पुराने फैसले से अलग बताया जा रहा है. इस साल के मानसून सेशन में डिप्टी सीएम ने स्पष्ट कर दिया कि कॉलम में सिर्फ भूमिहार लिखा जाएगा.

विजय सिन्हा को लेकर भी उठे थे सवाल

विजय सिन्हा भी भूमिहार समाज से आते हैं. आरोप लगाए गए थे कि उन्हें पहले राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से हटाया गया और बाद में उनके कई फैसले भी बदल दिए गए. कुछ लोगों ने यह भी कहा था कि उन्हें उपमुख्यमंत्री पद से हटाने के पीछे भी जातीय कारण थे. अब देवेश कुमार के एमएलसी पद छोड़ने के बाद यह पूरा विवाद फिर चर्चा में आ गया है.

2020 विधानसभा चुनाव का दिया उदाहरण

राजनितिक जानकारों की मानें तो अगर यही स्थिति बनी रही तो अगले चुनाव में 2020 से भी खराब नतीजे सामने आ सकते हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए कई शहरी सीटों पर हार गया था.

इनमें मुजफ्फरपुर, मधुबनी, सीवान, भागलपुर, खगड़िया, जमालपुर, शेखपुरा, बक्सर, भभुआ, सासाराम, जहानाबाद और औरंगाबाद जैसी सीटें शामिल थीं. ऐसे में भाजपा और जदयू को यह समझना चाहिए कि इन इलाकों में कौन-सा वर्ग नाराज था.

अगले चुनाव को लेकर भी जताई चिंता

राजनितिक विश्लेषकों का कहना है कि आज भले ही भूमिहार समाज से मुख्यमंत्री बनना आसान नहीं हो, लेकिन यह समाज चुनाव का रुख बदलने की ताकत रखता है. उन्होंने कहा कि यूजीसी गाइडलाइन को लेकर भी इस समाज में पहले से नाराजगी है. अगर यह नाराजगी बढ़ी तो अगले चुनाव में इसका असर देखने को मिल सकता है.

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भूमिहार ब्राह्मण नाम पर भी विवाद

पिछले महीने विधानसभा में सरकार की ओर से जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा था कि सरकारी रिकॉर्ड में इस जाति को 'भूमिहार ब्राह्मण' के नाम से दर्ज करने की कोई योजना नहीं है. सरकार का कहना है कि रिकॉर्ड में केवल भूमिहार लिखा जाएगा.

इस मुद्दे पर यह भी कहा गया कि 1931 की जनगणना रिपोर्ट और कई जमीन के दस्तावेजों में भूमिहार ब्राह्मण लिखा हुआ है. इसके बावजूद सरकार ने इस आधार को स्वीकार नहीं किया. इसी वजह से समाज के लोगों में नाराजगी और बढ़ने की बात कही जा रही है.

बिहार की राजनीति में विधान पार्षद (MLC) देवेश कुमार का इस्तीफा एक नए विवाद का कारण बन गया है. आरोप लग रहे हैं कि दीपक प्रकाश की कुर्सी बचाने के लिए बीजेपी के पुराने वफादार और मिजोरम प्रभारी देवेश कुमार की बलि चढ़ा दी.

देवेश कुमार का कार्यकाल मार्च 2027 तक था. महज दो महीने पहले ही विधान परिषद् के लिए 9 सदस्य चुने गए थे, जिनमें एक भी भूमिहार नेता शामिल नहीं था. हाल ही में अरविंद शर्मा को एमएलसी जरूर बनाया गया, लेकिन इसके बदले देवेश कुमार की कुर्सी छीनने के फैसले से समाज में बेहद गलत संदेश गया है.

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब विधानसभा में भूमिहार ब्राह्मण दर्ज कराने के मुद्दे पर बीजेपी के ही विधायक अपनी सरकार को घेर चुके हैं.

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लेखक के बारे में

By परितोष शाही

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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