बिहार में भूमि विवाद पर सख्ती, अब 3 महीने में निपटेंगे केस,लंबित की नई परिभाषा लागू

Bihar Bhumi: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जमीन विवादों के निपटारे के लिए 'डेडलाइन' तय कर दी है. अब अधिकारियों की सुस्ती नहीं चलेगी, क्योंकि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने साफ कर दिया है कि जनता के अधिकारों से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

Bihar Bhumi: बिहार में जमीन विवादों के लंबे समय तक लंबित रहने की समस्या पर अब प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि भूमि से जुड़े वादों का निष्पादन हर हाल में तीन महीने के भीतर किया जाये.

इसके साथ ही ‘लंबित’ मामलों की परिभाषा भी तय कर दी गयी है, जिससे फाइलों को बेवजह अटकाने की गुंजाइश कम होगी.

‘लंबित’ की नई परिभाषा?

अक्सर अधिकारी मामलों को ‘लंबित’ बताकर पल्ला झाड़ लेते थे, लेकिन सरकार ने अब इस शब्द की परिभाषा ही बदल दी है. अब केवल उन्हीं मामलों को ‘लंबित’ माना जाएगा, जिनमें सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC), 1908 के तहत किसी सक्षम न्यायालय द्वारा ‘स्टे ऑर्डर’ या ‘अस्थायी निषेधाज्ञा’ जारी की गई हो.

इसके अलावा अन्य सभी मामलों को हर हाल में समय-सीमा के भीतर निपटाना होगा. बिना ठोस कानूनी रुकावट के फाइल दबाकर बैठने वाले अफसरों पर गाज गिरना तय है.

प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी डिविजनल कमिश्नर, कलेक्टर और भूमि सुधार डिप्टी कलेक्टर को लेटर लिखकर साप्ताहिक समीक्षा बैठक अनिवार्य करने को कहा है, ताकि तय समय-सीमा में मामलों का निष्पादन सुनिश्चित हो सके.

अलग-अलग मामलों के लिए तय समय सीमा

सरकार ने राजस्व न्यायालयों में चल रहे मामलों के लिए पहले से तय समय-सीमा को फिर से सख्ती से लागू करने का आदेश दिया है. दाखिल-खारिज, अपील, जमाबंदी रद्दीकरण, लगान निर्धारण, बटाइदारी वाद, अतिक्रमण और भू-हदबंदी जैसे अधिकांश मामलों को 30 से 90 दिनों के भीतर निपटाना होगा. भू-मापी जैसे तकनीकी मामलों के लिए 7 से 11 दिन की अवधि तय है, ताकि जमीन माप से जुड़े विवाद जल्दी सुलझ सकें.

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने चेतावनी दी है कि आरसीएमएस (RCMS) या बिहार भूमि पोर्टल पर दर्ज मामलों में देरी कतई बर्दाश्त नहीं होगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि अनावश्यक विलंब, लापरवाही या उदासीनता दिखाने वाले कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के आम नागरिक को अपने ही हक की जमीन के लिए सालों इंतजार न करना पड़े. डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए अब हर फाइल की मूवमेंट पर मुख्यालय से नजर रखी जा रही है.

पोर्टल पर दर्ज मामलों पर भी सख्ती

आरसीएमएस और बिहार भूमि पोर्टल पर दर्ज मामलों के समय-सीमा में निष्पादन को हर हाल में सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. विभाग ने स्पष्ट कहा है कि लापरवाही, विलंब या उदासीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जायेगी.

उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि जमीन से जुड़े मामलों में देरी सीधे जनता के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा है और इससे समझौता नहीं किया जायेगा.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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