Bharat Tiwari Encounter: पिछले दिनों बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर के बिलौटी गांव में भरत तिवारी के समर्थन में एक महापंचायत हुई थी. अब इसके जवाब में एक और महापंचायत बुलाने का ऐलान कर दिया गया है. यह नई महापंचायत 5 जुलाई को जगदीशपुर में आयोजित की जाएगी. इसके आयोजकों का कहना है कि वे इस कार्यक्रम के जरिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मजबूत करेंगे. इसमें बहुजन समाज के लाखों लोगों की भीड़ जुटाने का दावा किया जा रहा है.
कहां होगी यह नई महापंचायत और किसने बुलाया?
इस कार्यक्रम का नाम बहुजन महापंचायत रखा गया है. यह 5 जुलाई को जगदीशपुर के लाल बिहारी सिंह टोला हाई स्कूल मैदान में होगी. इस महापंचायत को बहुजन आर्मी नाम का एक संगठन बुला रहा है. बहुजन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोल्डन दास ने सोशल मीडिया के जरिए दलित, आदिवासी, पिछड़ा और अल्पसंख्यक समाज के लोगों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील की है.
महापंचायत बुलाने की असली वजह क्या है?
गोल्डन दास ने एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में बताया कि यह महापंचायत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को समर्थन देने के लिए है. भरत तिवारी के एनकाउंटर के विरोध में सवर्ण समाज ने बिलौटी गांव में महापंचायत की थी. उसी के जवाब में अब बहुजन समाज एकजुट होकर सरकार के पक्ष में खड़ा हो रहा है. गोल्डन दास ने यह भी कहा कि आने वाले समय में दिल्ली में भी ऐसी ही महापंचायत की जाएगी.
पोस्टर में लालू, नीतीश और मायावती की तस्वीर
5 जुलाई की महापंचायत के लिए सोशल मीडिया पर जो पोस्टर शेयर किए जा रहे हैं, वे काफी चर्चा में हैं. इन पोस्टरों में भगवान बुद्ध, सम्राट अशोक और डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ-साथ लालू यादव, कर्पूरी ठाकुर, नीतीश कुमार, रामविलास पासवान, मायावती और मुलायम सिंह यादव जैसे बड़े नेताओं की तस्वीरें भी लगाई गई हैं.
24 जून को हुई थी भरत तिवारी के समर्थन में महापंचायत
इससे पहले 24 जून को भरत तिवारी के समर्थन में बिलौटी गांव में बड़ी महापंचायत हुई थी. इसमें यूपी और बिहार के कई इलाकों से लोग आए थे. उस पंचायत में पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए दोषी पुलिस वालों की गिरफ्तारी की मांग की गई थी. साथ ही सरकार को भरत तिवारी के श्राद्ध तक का अल्टीमेटम दिया गया था. जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी उस कार्यक्रम में शामिल हुए थे.
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17 जून को कैसे हुआ था भरत तिवारी का एनकाउंटर?
भोजपुर के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत तिवारी की 17 जून को पुलिस की गोली लगने से मौत हो गई थी. परिवार का आरोप है कि उसने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था, फिर भी उसे 5 गोलियां मारी गईं. परिवार की शिकायत पर तत्कालीन एसडीपीओ और थानेदार समेत कई पुलिस वालों पर हत्या का केस दर्ज हुआ है.
भरत तिवारी बाढ़ पीड़ितों की आवाज उठा रहा था, लेकिन उसके पास एक अवैध पिस्टल भी थी. पुलिस का कहना है कि उसने थानेदार पर पिस्टल तान दी थी और वह मानसिक रूप से बीमार था. अब इस पूरे मामले की जांच के लिए सीएम सम्राट चौधरी ने पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग बना दिया है.
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