कबरनगर ,भागलपुर से
रिपोर्ट,
भीषण गर्मी में नगर पंचायत अकबरनगर में पानी का संकट से लोग परेशान हो रहे है. जलनल योजना का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है. पिछले कई वर्षो से यहां के वार्डों में बने जलमीनार से नल मे पानी नही पहुंच रहा है. नल से महज एक बूंद पानी के लिए तरस रहे है. स्वच्छ व शुद्ध जल की बात करना यहां बेमानी साबित होगा. जिस वार्ड मे जलमीनार है वहां भी पानी मिलना मुश्किल है. नगर पंचायत के अध्यक्ष किरण देवी इस जिम्मेदारी से पाला झाड़ते हुये कहती है कि यह काम पीएचईडी विभाग का है. सिर्फ नाला,पीसीसी सड़क निर्माण मे नगर पंचायत राशि खर्च कर ठीकेदारी प्रथा को आगे बढ़ा रहे है.पानी से परेशान लोग इसकी शिकायत करना भी बंद कर दिया है.हर महीने लाखों खर्च पर पानी के लिये तरस रहे वार्डवासी
जलनल योजना धरातल पर कम दिखाई पड़ता है. योजना फाइलों पर खूब दावे कर रहे है. जलमीनार के अपरेटर को भी मानदेय भुगतान कर रहे है. लाखों खर्च हर महीने होने के बाद भी एक बूंद पानी के लिये वार्डवासी तरस रहे है. जानकार बताते हैं बेशक यह योजना कागज पर सरपट दौड़ रहा है. सरकार के इस ड्रीम प्रोजेक्ट एवं मेगा योजना के रखरखाव के लिए जहां नगर पंचायत प्रशासन की सतर्कता की बात कही जा रही है. नगर पंचायत क्षेत्र में ठेकेदार एवं विभागीय अधिकारियों के मिली भगत से यह योजना सरजमीन पर फलता फूलता दिखाई नहीं दे रहा है. विभिन्न वार्डों के लोगों ने बताया की नल जल योजना दिखाबा बना हुआ है. योजना से संबंधित जल मिनार सफेद हाथी बनकर शोभा की वस्तु बन गई है.लोगों ने कहा, शिकायत की पर नहीं हुई कार्रवाई
लोगों के द्वारा कई बार नगर पंचायत मे प्रशासन से शिकायत भी की गई मगर कोई भी व्यक्ति उन लोगों के शिकायत पर गंभीरता नहीं बरत रहा है. एक वार्ड पार्षद ने बताया कि विभिन्न सभी वार्ड पार्षद अध्यक्ष के प्रलोभन मे फंसे है.कोई आवाज नही उठा रहे है. सशक्त स्थाई समिति मे चुने गये सदस्य भी अध्यक्ष पति के दबाव मे रहते है. आज तक नल जल योजना क्या एक बूंद पानी भी किसी के हलक तक नहीं पहुंचा है. कई बार अधिकारियों को कहा गया लेकिन नतीजा सिफर रहा. शिकायत की गई मगर आज तक समाधान नहीं हुआ और सर जमीन पर समस्या ज्यों का त्यों दिखाई देता है. जानकारों की मानें तो ठेकेदार को लगभग राशि का भुगतान हो चुका है. यही वजह है कि ठेकेदार को कोई मतलब नहीं है और इस 11 वार्ड वाले नगर पंचायत में आज तक किसी को नल जल का एक बूंद पानी नसीब नहीं होता है. लाखों की लागत वाली यह योजना कागज पर कथित तौर पर शायद सरपट दौड़ रही है.
