भागलपुर से ललित किशोर मिश्र की रिपोर्ट
Vikramshila Bridge : विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज निर्माण का काम पूरा होने के बाद अब आम लोगों की आवाजाही फिर से सुचारु हो गई है. इस उपलब्धि के पीछे सीमा सड़क संगठन (BRO) की स्वास्तिक परियोजना की 82 सदस्यीय टीम की अथक मेहनत रही, जिसने तूफान और बारिश जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच भी काम नहीं रोका.
सिक्किम से आई इस टीम का नेतृत्व अधीक्षण अभियंता बिपिन कुमार चंद ने किया. टीम ने महज 20 दिनों में चार बेली ब्रिज तैयार कर एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा कर दिखाया.
गंगा में समाए स्लैब के बाद शुरू हुई चुनौती
तीन मई की रात विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या चार और पांच के बीच का 34 मीटर लंबा स्लैब गंगा नदी में गिर गया था. इस घटना के बाद भागलपुर और आसपास के जिलों के लोगों की आवाजाही प्रभावित हो गई.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चार मई को अधीक्षण अभियंता बिपिन कुमार चंद के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम भागलपुर पहुंची. टीम ने सेतु और गंगा नदी से प्रभावित हिस्से का निरीक्षण किया तथा रिपोर्ट तैयार कर संबंधित विभागों को सौंप दी. इसके बाद बेली ब्रिज निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी गई.
14 मई को पहुंची टीम, 16 मई से शुरू हुआ निर्माण
बीआरओ की स्वास्तिक परियोजना से जुड़े 82 सदस्य 14 मई की रात भागलपुर पहुंचे. कोलकाता से निर्माण सामग्री मंगाई गई और 16 मई से बेली ब्रिज निर्माण का कार्य शुरू हो गया.
सबसे पहले उस हिस्से पर काम किया गया जहां 34 मीटर का स्लैब ध्वस्त हुआ था. लगातार बारिश, तेज हवाओं और बदलते मौसम के बावजूद टीम ने दिन-रात काम जारी रखा. परिणामस्वरूप निर्धारित समय के भीतर चारों बेली ब्रिज तैयार कर लिए गए.
लोगों की राहत बनी टीम की सबसे बड़ी उपलब्धि
अधीक्षण अभियंता बिपिन कुमार चंद ने बताया कि सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था. ऐसे में पूरी टीम ने मिशन मोड में काम करते हुए पुल को जल्द चालू कराने का लक्ष्य रखा.
उन्होंने कहा कि जब लोगों ने नए बने बेली ब्रिज से आवागमन शुरू किया तो पूरी टीम को अपने प्रयासों की सफलता का एहसास हुआ. अब इस बेली ब्रिज की निगरानी और रखरखाव केंद्र और बिहार सरकार के समन्वय से किया जाएगा.
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