भागलपुर से आरफीन जुबैर की रिपोर्ट
TMBU PG Semester 2 Exam: टीएमबीयू के पीजी सेमेस्टर टू परीक्षा में उत्तरपुस्तिका बदलने के आरोप ने नया मोड़ ले लिया है. मारवाड़ी कॉलेज परीक्षा केंद्र से शुरू हुआ मामला अब विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुंच गया है. परीक्षा नियंत्रक ने स्पष्ट किया है कि प्रभारी कुलपति के आदेश पर जांच कमेटी गठित की जाएगी. इस बीच परीक्षा विभाग ने पीजी फिजिक्स और गणित विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है, जिस पर दोनों विभागों ने आपत्ति जताई है.
तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) की पीजी सेमेस्टर टू परीक्षा अब सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली पर उठे बड़े सवाल का केंद्र बन गई है. मारवाड़ी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर उत्तरपुस्तिका बदलने के आरोप सामने आने के बाद मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है. विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच की तैयारी शुरू कर दी है और अब प्रभारी कुलपति के आदेश पर औपचारिक जांच कमेटी गठित की जाएगी.
इस पूरे घटनाक्रम ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच यह चिंता बढ़ा दी है कि यदि परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता और उत्तरपुस्तिकाओं की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं, तो इसका असर पूरे विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है.
फिजिक्स विभाग ने परीक्षा विभाग की कार्रवाई पर उठाए सवाल
पीजी फिजिक्स विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुदेश जायसवाल ने परीक्षा नियंत्रक द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि विभाग ने 10 अप्रैल 2026 को प्रश्नपत्र का मॉडरेशन कर उसे सीलबंद लिफाफे में परीक्षा विभाग को सौंप दिया था. इसके बाद प्रश्नपत्र की सुरक्षा और गोपनीयता की जिम्मेदारी पूरी तरह परीक्षा विभाग की थी.
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि 18 जुलाई 2026 को मारवाड़ी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर प्रश्नपत्र लीक होने या उत्तरपुस्तिका बदलने जैसी घटना हुई, तो उसके लिए पीजी फिजिक्स विभाग को कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है. उनका कहना है कि बिना किसी ठोस आधार के विभाग पर संदेह करना उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है.
गणित विभाग ने भी कहा. बेवजह परेशान किया जा रहा है
पीजी गणित विभाग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद साह ने भी परीक्षा विभाग की कार्रवाई पर आपत्ति जताई. उन्होंने बताया कि संबंधित छात्रों को पूछताछ के लिए विभाग में बुलाया गया था, लेकिन छात्र उपस्थित नहीं हुए.
डॉ. साह ने कहा कि पूरे मामले से विभाग का कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है. उनका मानना है कि जांच का केंद्र परीक्षा विभाग और परीक्षा केंद्र की व्यवस्थाएं होनी चाहिए.
परीक्षा विभाग में बाहरी व्यक्ति पकड़ा गया
मामला सामने आने के बाद परीक्षा विभाग भी सक्रिय हो गया. विभाग में काम करने वाले लोगों और आने-जाने वालों की निगरानी बढ़ाई गई. इसी दौरान परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनोद कुमार ओझा ने परीक्षा विभाग में अवैध रूप से काम कर रहे एक बाहरी व्यक्ति को पकड़ लिया.
जानकारी के अनुसार वह व्यक्ति पहले एक निजी एजेंसी के तहत काम करता था और परीक्षा विभाग की गोपनीय शाखाओं तक पहुंच बना चुका था. शिकायत मिलने के बाद उसे पकड़कर कड़ी चेतावनी दी गई और वहां से हटाया गया. इस घटना ने परीक्षा विभाग की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
जांच कमेटी करेगी पूरे नेटवर्क की पड़ताल
परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनोद कुमार ओझा ने कहा कि विश्वविद्यालय पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराना चाहता है. जांच का उद्देश्य केवल उत्तरपुस्तिका बदलने की घटना की पुष्टि करना नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी होगा कि पहले से लिखी हुई उत्तरपुस्तिकाएं छात्रों तक कैसे पहुंचीं, प्रश्नपत्र किस माध्यम से बाहर आया और इस पूरे रैकेट में कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं.
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभारी कुलपति के आदेश पर जांच कमेटी गठित की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
एसएम कॉलेज सेंटर पर भी परीक्षा के दौरान हुआ विवाद
इसी बीच बुधवार को एसएम कॉलेज परीक्षा केंद्र पर पीजी सेमेस्टर टू कॉमर्स की परीक्षा के दौरान एक अलग घटना सामने आई. परीक्षा समाप्त होने से लगभग आधा घंटा पहले एक छात्र प्रश्नपत्र लेकर वॉशरूम चला गया.
जब शिक्षक ने उसके स्थान पर प्रश्नपत्र नहीं पाया, तो पूछताछ की गई. छात्र के लौटने पर उससे प्रश्नपत्र मांगा गया, लेकिन उसने पहले देने से इनकार किया और कथित रूप से अभद्र व्यवहार भी किया. इसके बाद उसकी उत्तरपुस्तिका और प्रश्नपत्र जब्त कर उसे केंद्राधीक्षक के पास ले जाया गया.
केंद्राधीक्षक प्रो. निशा झा के अनुसार छात्र ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित माफीनामा दिया और भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने का आश्वासन दिया. इसी कारण उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई नहीं की गई.
TMBU PG Semester 2 Exam: विश्वविद्यालय की साख पर असर डाल सकता है मामला
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्तरपुस्तिका बदलने जैसे आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो इसका असर विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणाली और डिग्री की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है. छात्र समुदाय अब जांच कमेटी की रिपोर्ट और विश्वविद्यालय प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर नजर बनाए हुए है.
