Bhagalpur news जीबी काॅलेज से तिरंगा यात्रा निकाली गयी

जीबी कॉलेज नवगछिया के एनसीसी कैडटों ने तिरंगा यात्रा निकाली.

जीबी कॉलेज नवगछिया के एनसीसी कैडटों ने तिरंगा यात्रा निकाली. एनसीसी जीबी कॉलेज नवगछिया 4/35 बिहार बटालियन, पूर्णिया की ओर से हर घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत एएनओ डॉ दिव्य प्रियदर्शी के नेतृत्व में तिरंगा यात्रा निकाली गयी. इस अवसर पर सभी कैडेटों ने हाथ में तिरंगा के साथ मिल टोला का भ्रमण कर लोगों को हर घर तिरंगा अभियान की जानकारी दी. तिरंगा यात्रा को प्रभारी प्राचार्य डॉ मनोज कुमार, डॉ मोसर्रत हुसैन, डॉ उषा शर्मा, डॉ श्वेता भारती, डॉ प्रताप राज व चेतन कुमार ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया.

भाजयुमो की तिरंगा यात्रा में सैकड़ों लोग हुए शामिल

15 अगस्त से पूर्व नवगछिया में तिरंगा यात्रा निकाली गयी. यात्रा भाजपा युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष कुणाल गुप्ता के नेतृत्व में स्टेशन गोलंबर चौक से महाराज चौक होते मुमताज मोहल्ला तक गयी. पार्टी कार्यालय में समापन किया गया. इस दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम् से पूरा नवगछिया गूंज उठा. लोगों के हाथों में तिरंगा झंडा सड़कों की शान बढ़ा रहा था. पूरा नवगछिया तिरंगामय था. छोटे-बड़े सभी इस तिरंगा यात्रा से जुड़े थे. महिला छात्रा भी तिरंगा यात्रा में शामिल थी. मौके पर जिलाध्यक्ष मुक्तिनाथ सिंह निषाद, प्रभु प्रिंस, अभिषेक गुप्ता, पिंटू सम्राट, धीरज कुमार, आनंद कुमार, मानस चिरानिया, प्रिंस गुप्ता, प्रहलाद कुमार, मुस्कान कुमारी, कोमल कुमारी, मीनाक्षी कुमारी, शालिनी कुमारी सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे.

एनटीपीसी कहलगांव अस्पताल ने सर्पदंश पीड़िता को दिया जीवनदान

सन्हौला प्रखंड लक्ष्मीपुर गांव की सोनाली कुमारी(14) पिता गरीब महतो को आठ अगस्त को मरणासन्न अवस्था में कहलगांव एनटीपीसी के जीवन ज्योति अस्पताल में सुबह आठ बजे लाया गया था. मामला सर्पदंश का था. परिजन झाड़-फूंक और ग्रामीण चिकित्सा में लगभग छह घंटे गंवा चुके थे. सोनाली के शरीर पर किसी जहरीले सांप के काटने के स्पष्ट लक्षण थे. सोनाली की सांस टूटने लगी थी. अस्पताल के चिकित्सकों ने तुरंत उपचार आरंभ किया. गरीब पृष्ठभूमि से होने से एनटीपीसी के सीएसआर पहल के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा दी गयी. लगभग 24 घंटे के सतत निगरानी और उपचार के उपरांत सोनाली की हालत स्थिर हुई. परिजनों को राहत मिली. अस्पताल में ही सोनाली ने अपने भाई को राखी बांधी. इस अस्पताल में प्रति वर्ष लगभग साढ़े तीन सौ सर्पदंश के मरीज उपचार के लिए आते हैं, जिसमें अधिकतर सकुशल घर वापस लौटते हैं. इस अस्पताल को सर्पदंश के मामले में महारथ हासिल है.

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By JITENDRA TOMAR

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