नवगछिया से अंजनी कुमार कश्यप की रिपोर्ट :
पिछले 36 घंटों में आयी भीषण आंधी, तूफान और मूसलाधार बारिश ने नवगछिया अनुमंडल के किसानों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है. खेतों में महीनों की हाड़-तोड़ मेहनत से तैयार खड़ी फसलें अब मिट्टी में मिल चुकी हैं. अनुमंडल के खरीक, बिहपुर, नारायणपुर, गोपालपुर और नवगछिया प्रखंड के सैकड़ों गांवों में तबाही का ऐसा मंजर है, जिसे देखकर किसानों के आंसू नहीं रुक रहे हैं. जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक हरियाली लहलहा रही थी, वहां अब सिर्फ टूटे पौधे और बर्बाद फसलें नजर आ रही हैं.केले, आम और लीची के बागान जमीन पर बिछे
नवगछिया अनुमंडल मुख्य रूप से केले की बड़े पैमाने पर खेती के लिए जाना जाता है. प्रकृति का यह कहर केले की खेती करने वाले किसानों के लिए किसी आर्थिक भूकंप से कम नहीं है. तेज आंधी के कारण केले के बागान के बागान पूरी तरह जमीन पर धराशायी हो चुके हैं. इसके साथ ही आम और लीची के पेड़ों से टूटकर गिरे कच्चे फल किसानों की बर्बादी की गवाही दे रहे हैं.हजारों करोड़ के नुकसान का अनुमान
क्षेत्र के प्रभावित किसान शैलेश मुरारी, पवन मंडल, शंकर मंडल, घनश्याम मंडल, अजय कुमार सिंह, राजीव सिंह और अंजनी कुमार समेत कई किसानों ने बताया कि इस आपदा से नवगछिया अनुमंडल में हजारों करोड़ रुपए की क्षति हुई है. केले की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है और आम-लीची के बागानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है.
कर्ज के संकट और भविष्य की चिंता में डूबे किसान
कई किसानों ने बैंक और साहूकारों से भारी ब्याज पर कर्ज लेकर खेती की थी. उन्हें उम्मीद थी कि इस बार अच्छी पैदावार से कर्ज उतर जाएगा और घर की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, लेकिन सब कुछ खत्म हो गया. गांवों में सबसे दर्दनाक दृश्य उन किसानों का है जो अपनी उजड़ी खेती के बीच खड़े होकर भविष्य की चिंता में डूबे हैं. अपनी आंखों में आंसू लिए एक पीड़ित किसान ने कहा, इस फसल के भरोसे बेटी की पढ़ाई और घर का खर्च चलना था. अब फसल ही नहीं बची, तो समझ नहीं आ रहा कि बच्चों का पेट कैसे भरेंगे और परिवार कैसे चलेगा.प्रशासन पर उठ रहे सवाल, मुआवजे की मांग
इतनी बड़ी तबाही के बावजूद अब तक स्थानीय प्रशासन की ओर से राहत की कोई ठोस घोषणा नहीं होने पर किसानों में भारी आक्रोश है. ग्रामीणों और किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल और पारदर्शी हवाई व जमीनी सर्वे कराया जाये. पीड़ित किसानों के कृषि कर्ज को तुरंत माफ किया जाये. प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की जाये. किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द सर्वे कराकर उचित मुआवजा नहीं दिया, तो क्षेत्र के कई परिवार गहरे आर्थिक संकट और कर्ज के जाल में डूब जायेंगे. नवगछिया के गांवों से अब एक ही पुकार उठ रही है कि आपदा ने सब कुछ छीन लिया है, अब केवल सरकार ही आखिरी सहारा है.
