bhagalpur news. नगर निगम क्षेत्र में अंचल गठन की प्रक्रिया तेज, कमेटी गठित
नगर निगम में अंचल गठन की प्रक्रिया तेज.
-अंचल गठन से सुधरेगी नगर निगम की कार्यप्रणाली, नागरिक सेवाओं को मिलेगा लाभनगर निगम क्षेत्र में अंचल गठन की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया तेज हो गयी है. निगम प्रशासन ने इस दिशा में औपचारिक पहल करते हुए कमेटी का गठन कर दिया है, जिसमें उपनगर आयुक्त, टाउन प्लानर सहित संबंधित विभागों के अन्य वरीय अधिकारियों को शामिल किया गया है. कमेटी का मुख्य दायित्व नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत अंचल गठन से जुड़े सभी पहलुओं पर विचार करना और बोर्ड की बैठक से पहले अनुशंसा प्रस्तुत करना है.निगम प्रशासन के अनुसार आगामी बोर्ड की बैठक से पहले यह तय किया जायेगा कि नगर निगम क्षेत्र में कुल कितने अंचलों का गठन किया जाना है. इसके साथ ही अंचल गठन से संबंधित विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर बोर्ड की बैठक में रखेगा और उसे स्वीकृति के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग (यूडीएचडी) को भेजा जायेगा. यूडीएचडी से मंजूरी मिलते ही अंचल गठन की अधिसूचना जारी कर दी जायेगी और इसके बाद प्रशासनिक ढांचा लागू किया जायेगा.यूडीएचडी ने पिछले वर्ष अगस्त माह में ही नगर निकायों के अंतर्गत अंचल गठन को लेकर अधिसूचना जारी की थी. हालांकि, इसके बाद न तो कोई बैठक हुई और न ही अंचल गठन के लिए कोई स्पष्ट कैटेरिया मुख्यालय ने तय बताया. कैटेरिया के अभाव में यह पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी रही.
विभिन्न आयामों पर होगा अंचल का गठन
नगर निगम के अंतर्गत अंचल का गठन विभिन्न आयामों में से किसी एक के आधार पर किया जायेगा. इसमें शहर की भौगोलिक स्थिति, आबादी, हाउसहोल्ड की संख्या, सड़क नेटवर्क, नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता सहित अन्य मानकों को शामिल किया जा सकता है. इन बिंदुओं में से किसी भी आधार पर अंचलों की सीमा और संख्या निर्धारित की जायेगी.प्रशासनिक मजबूरी बनी अंचल गठन की वजह
वर्तमान में नगर निगम द्वारा केंद्र प्रायोजित और राज्य सरकार की योजनाओं के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों को साफ-सफाई, समुचित ड्रेनेज, जलापूर्ति, कूड़ा उठाव, कचरा संग्रहण, स्ट्रीट लाइटिंग जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही है. इसके अतिरिक्त आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्य, जैसे बाढ़, सुखाड़, भीषण गर्मी, लू, जलजमाव और अतिक्रमण नियंत्रण की जिम्मेदारी भी नगर निगम पर ही है. नगर निगम का कार्यक्षेत्र अत्यंत विस्तृत होने के कारण नगर आयुक्त के लिए सभी वार्डों में चल रही योजनाओं और कार्यों की नियमित निगरानी करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो जाता है. इसका सीधा असर योजनाओं की गुणवत्ता, समय पर क्रियान्वयन और जनसेवाओं पर पड़ता है. इसी को देखते हुए यूडीएचडी ने नगर निगम में अंचल गठन को आवश्यक बताया है, ताकि प्रशासनिक विकेंद्रीकरण के जरिये निगरानी व्यवस्था मजबूत हो और नागरिक सुविधाओं में सुधार किया जा सके.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
