प्रोबायोटिक्स को शामिल करके बाजरे से प्राप्त दूध के पोषण मूल्य को करना है समृद्ध

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में शुक्रवार को पीडीएम आरएजी के तहत शोध गतिविधि को लेकर विचार मंथन कार्यक्रम हुआ.

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर में शुक्रवार को पीडीएम आरएजी के तहत शोध गतिविधि को लेकर विचार मंथन कार्यक्रम हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ अनिल कुमार सिंह ने की, तो आइसीएआर, नई दिल्ली के प्रोसेस इंजीनियरिंग के एडीजी डॉ के नरसैया ने शिरकत की.

उन्होंने कहा कि पीडीएम समूह अंतर्गत आने वाले विषय एफएसपीएचटी और एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग हैं और दोनों विषयों से संबंधित कुल 16 वैज्ञानिक बैठक में उपस्थित थे. उन्होंने अपनी परियोजनाओं की शोध प्रगति प्रस्तुत की. विशेषज्ञ डॉ के नरसैया ने परियोजनाओं की आलोचनात्मक समीक्षा की और पीडीएम समूह के तहत अनुसंधान कार्यक्रमों को समृद्ध करने के लिए महत्वपूर्ण इनपुट प्रदान किया. विशेषज्ञों द्वारा प्रदान किये गये इनपुट की मुख्य विशेषताएं हैं वैज्ञानिक तरीके से प्रोबायोटिक्स को शामिल करके बाजरे से प्राप्त दूध के पोषण मूल्य को समृद्ध करना. पैकेजिंग सामग्री की गुणवत्ता में सुधार करके ताजे कटे कच्चे कटहल के शेल्फ जीवन को बढ़ाना एवं राज्य के किसानों के लाभ के लिए प्रभावोन्मुख पोस्टहार्वेस्ट मशीनरी प्राप्त करने के लिए कृषि अभियांत्रिकी विभाग के अंतर्गत विकसित कृषि मशीनरी परीक्षण इकाई की मान्यता प्रक्रिया शुरू करना.

अनुसंधान निदेशक ने कहा कि विश्वविद्यालय के अनुसंधान कार्यक्रमों को समृद्ध करने और राज्य के किसानों के हित में सर्वोत्तम संभव प्रभाव लाने के लिए अनुसंधान निदेशालय के स्तर पर हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है. बीएयू, सबौर की डीडीआर डॉ शैलबाला देई ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

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