Bhagalpur News. मायागंज अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही पर विधायक नाराज, प्रबंधन ने इमरजेंसी बैठक कर दी चेतावनी
विधायक डॉक्टर से नाराज.
अस्पताल अधीक्षक ने कहा- कोई पीजी डॉक्टर, सीनियर रेजीडेंट या इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात स्टाफ अनुपस्थित पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जायेगीमायागंज अस्पताल में सोमवार की शाम दो पीजी डॉक्टरों के व्यवहार को लेकर विधायकों और डॉक्टरों के बीच विवाद हो गया, जिससे अस्पताल अधीक्षक को भी विधायक की नाराजगी झेलनी पड़ी. इस घटना के बाद मायागंज अस्पताल में सभी विभागाध्यक्षों की आपातकालीन बैठक बुलाई गयी. बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिये गये कि वे न केवल इमरजेंसी और यूनिट में नियमित रूप से राउंड करें और मरीजों का समय पर उपचार सुनिश्चित करेंगे, बल्कि चेंबर में भी लगातार मौजूद रहेंगे. ड्यूटी में लापरवाही न हो, इसका पूरा ध्यान रखेंगे.
केस 1: बर्न वार्ड में महिला मरीज के इलाज में देरी पर नाराजगी
पीरपैंती की निवासी किरन देवी को सोमवार शाम झुलसी अवस्था में सर्जरी विभाग के बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया था. बेड नंबर 14 पर भर्ती महिला मरीज का इलाज डॉक्टर बीके जायसवाल की यूनिट में होना था. उसी शाम करीब सात बजे पीरपैंती के विधायक मुरारी पासवान मरीज से मिलने पहुंचे. विधायक को वहां पता चला कि डॉक्टर मरीज देखने नहीं आ रहे हैं. जब उन्होंने डॉक्टर से उपचार में देरी का कारण पूछा तो डॉक्टर ने विधायक से उलझने की कोशिश की. इसके बाद यूनिट इंचार्ज और विधायक के बीच कहासुनी हुई. नाराज विधायक ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. हिमांशु परमेश्वर दुबे से शिकायत की. अधीक्षक ने तत्काल बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया. मंगलवार को स्थानीय विधायक रोहित पांडेय भी महिला मरीज की जानकारी लेने अस्पताल पहुंचे, जहां उन्हें बताया गया कि डॉक्टर बीके जायसवाल ने महिला मरीज का इलाज स्वयं संभाल लिया है और उसकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हो रहा है.केस 2: घायल मरीज को भर्ती करने से इंकार, भाजपा नेता ने की शिकायत
सोमवार शाम करीब सात बजे मारपीट में घायल बांका जिले के निवास कुमार को मायागंज अस्पताल के इमरजेंसी सर्जरी वार्ड में लाया गया. उनके साथ वरिष्ठ भाजपा नेता भी थे.वार्ड में पीजी डॉक्टर ने मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि मरीज का प्राथमिक इलाज तो हो गया है, लेकिन रेफर कराये बिना भर्ती नहीं किया जा सकता. जब भाजपा नेता ने बार-बार आग्रह किया, तब भी डॉक्टर ने भर्ती से इंकार कर दिया.
नाराज नेता ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय से इस मामले की शिकायत की. इसके अलावा उन्होंने अस्पताल अधीक्षक को भी सूचित किया.अधीक्षक ने तुरंत डॉक्टर से बात कर मरीज को भर्ती कराने का निर्देश दिया और पुलिस को भी इसकी सूचना देने के निर्देश दिये. हालांकि, मरीज उस समय वार्ड से कहीं चला गया था.मरीजों की देखभाल और इमरजेंसी सेवाओं में ढिलाई बर्दाश्त नहीं करने की दी चेतावनी
दोनों घटनाओं के बाद मंगलवार को अस्पताल अधीक्षक ने जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अविलेश कुमार की मौजूदगी में अस्पताल के सभी विभागाध्यक्षों की बैठक बुलायी. बैठक में अधीक्षक ने मेडिसिन और सर्जरी विभाग के अध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिये कि इमरजेंसी में पीओडी-एसओडी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये.
उन्होंने यूनिट इंचार्ज को वार्ड और इंडोर में भर्ती मरीजों का नियमित निरीक्षण करने और राउंड लगाने का आदेश दिया. अधीक्षक ने चेतावनी दी कि अगर कोई पीजी डॉक्टर, सीनियर रेजीडेंट या इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात स्टाफ अनुपस्थित पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी.साथ ही रात्रि में नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए मैट्रन को निर्देश दिये गये. किसी भी नर्स या स्टाफ के अनुपस्थित मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी. अस्पताल अधीक्षक ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया कि मरीजों की देखभाल और इमरजेंसी सेवाओं में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जायेगी. बैठक में उपाधीक्षक डॉ. सुरेश प्रसाद सिंह, मेडिसिन विभाग अध्यक्ष डॉ. राजकमल चौधरी, सर्जरी विभाग अध्यक्ष डॉ. कुमार रत्नेश, स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग अध्यक्ष डॉ. अनुपमा सिन्हा, शिशु रोग विभाग अध्यक्ष डॉ. अंकुर प्रियदर्शी, ईएनटी विभाग अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार, हड्डी रोग विभाग अध्यक्ष डॉ. मसीह आजम, नेत्र विभाग अध्यक्ष डॉ. पम्मी राय, हॉस्पिटल मैनेजर सुनील कुमार गुप्ता समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे.
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