Bhagalpur News: भागलपुर के टीएमबीयू प्रशासनिक भवन परिसर में सोमवार को टीएमबीयू अतिथि शिक्षक संघ के बैनर तले महाधरना आयोजित किया गया. धरने को विश्वविद्यालय के विभिन्न शिक्षक संगठनों, तृतीय एवं चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी संघ तथा बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ की टीएमबीयू इकाई का समर्थन मिला. महाधरना में शिक्षकों ने सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली 2026 और प्रस्तावित बिहार राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 का विरोध करते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की.
55 वर्ष आयु सीमा और सेवा समायोजन की मांग
टीएमबीयू अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आनंद आजाद ने कहा कि यूजीसी रेगुलेशन 2018 के अनुरूप नई नियुक्ति नियमावली बनाई जाए. उन्होंने सहायक प्राध्यापक नियुक्ति की अधिकतम आयु सीमा 43 वर्ष से बढ़ाकर 55 वर्ष करने तथा स्नातक, स्नातकोत्तर, नेट, पीएचडी, शोधपत्र और अनुभव के आधार पर एपीआई स्कोर प्रणाली लागू करने की मांग की. साथ ही वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के सेवा समायोजन का प्रावधान करने की भी मांग उठाई.
विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर जताई चिंता
सिंडिकेट सदस्य प्रो. मुश्फिक आलम और सीनेट सदस्य डॉ. निर्लेश कुमार ने कहा कि प्रस्तावित बिहार राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2026 लागू होने से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. उनका कहना था कि डिग्री महाविद्यालय सीधे सरकार के अधीन चले जाएंगे, जिससे विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक और प्रशासनिक भूमिका कमजोर होगी.
शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका
Bhagalpur News: पूर्व प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक सिंह और सिंडिकेट सदस्य डॉ. मृत्युंजय सिंह गंगा ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि शिक्षण, शोध, परीक्षा और पाठ्यक्रम निर्माण के केंद्र हैं. यदि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता समाप्त होती है तो पूरे उच्च शिक्षा तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
बीएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनिरुद्ध प्रसाद, प्रो. मनोज कुमार, डॉ. जावेद अख्तर, कर्मचारी प्रतिनिधि रंजीत कुमार, सुशील मंडल, असीम कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार ने शिक्षकों और कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जायेगा.
