सुलतानगंज में कृषि क्रांति की नई मिसाल, ऑटोमेटिक तेल मिल से किसानों की बढ़ी आय

SultanGanj Modern Oil Mill: प्रखंड के खानपुर पंचायत अंतर्गत आभा रतनपुर गांव में कृषि विभाग के सहयोग से स्थापित 10 टन क्षमता वाली ऑटोमेटिक तेल मिल किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है.

सुलतानगंज (भागलपुर) से शुभंकर की रिपोर्ट:

SultanGanj Modern Oil Mill: कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में सुलतानगंज ने एक नई उपलब्धि हासिल की है. प्रखंड के खानपुर पंचायत अंतर्गत आभा रतनपुर गांव में कृषि विभाग के सहयोग से स्थापित 10 टन क्षमता वाली ऑटोमेटिक तेल मिल किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है. इस अत्याधुनिक इकाई से किसानों को अपनी तिलहन उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है, वहीं क्षेत्र के उपभोक्ताओं को शुद्ध एवं मिलावट रहित सरसों तेल उपलब्ध हो रहा है.प्रखंड कृषि पदाधिकारी सत्यम राज ने बताया कि तेल मिल के संचालन से किसानों का रुझान तिलहन फसलों की खेती की ओर बढ़ेगा. स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण और विपणन की सुविधा मिलने से किसान अधिक क्षेत्र में सरसों और अन्य तिलहन फसलों की खेती के लिए प्रेरित होंगे.

कृषि विभाग की सहायता से स्थापित हुई आधुनिक इकाई

कृषि विभाग की अनुदान योजना का लाभ लेकर किसान राणा भानु प्रताप सिंह ने इस ऑटोमेटिक तेल मिल की स्थापना की है. प्रखंड कृषि पदाधिकारी सत्यम राज ने बताया कि यह पूरे सुलतानगंज प्रखंड की पहली आधुनिक तेल मिल है, जो किसानों को उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की समग्र सुविधा उपलब्ध करा रही है.उन्होंने कहा कि अब किसानों को अपनी सरसों और अन्य तिलहन फसलों की बिक्री के लिए दूर-दराज के बाजारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है. स्थानीय स्तर पर तेल निष्कर्षण की सुविधा मिलने से उन्हें उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे तिलहन फसलों के रकबे में वृद्धि की संभावना भी बढ़ी है.

जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा

इस तेल मिल से सरसों तेल के साथ-साथ सरसों खल्ली का भी उत्पादन हो रहा है. किसान खल्ली का उपयोग जैविक खाद के रूप में अपने खेतों में कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ रही है और फसल उत्पादन में सुधार हो रहा है.कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों खल्ली के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा.

भागलपुर बाजार तक पहुंच रहा तेल

मिल में तैयार सरसों तेल की पैकेजिंग कर उसकी बिक्री की जा रही है. वर्तमान में सुलतानगंज के अलावा भागलपुर के विभिन्न बाजारों में भी इसकी आपूर्ति की जा रही है. संचालकों की योजना भविष्य में उत्पादन और विपणन का विस्तार कर अधिक किसानों और उपभोक्ताओं को इससे जोड़ने की है.

स्वरोजगार और कृषि आधारित उद्यमिता को मिलेगा बल

बीएओ सत्यम राज ने कहा कि यह परियोजना केवल तेल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को स्वरोजगार, मूल्य संवर्धन और कृषि आधारित उद्यमिता से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी.कृषि विभाग ने इस पहल को सुलतानगंज में कृषि आधुनिकीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है. विभाग का मानना है कि इस मॉडल से प्रेरित होकर अन्य किसान भी कृषि प्रसंस्करण इकाइयों और आधुनिक तकनीकों को अपनाएंगे, जिससे कृषि आधारित उद्योगों का विकास और किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी.

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Published by: Shruti Kumari

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