विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेला हो या साल भर बाबाधाम की यात्रा, उत्तर बिहार और देश भर से आने वाले लाखों कांवरियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. बाबा भोलेनाथ की नगरी देवघर जाने वाले श्रद्धालुओं के वर्षों पुराने सपने को अब पंख लगने जा रहे हैं. सुलतानगंज के अजगैवीनाथ धाम से पवित्र गंगाजल लेकर देवघर जाने वाले कांवरियों की कठिन यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए प्रस्तावित सुलतानगंज-देवघर फोरलेन परियोजना अब केवल कागजों और फाइलों तक सीमित नहीं रही है. पथ निर्माण विभाग की ओर से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर जमीनी धरातल पर काम की रफ्तार तेज कर दी गई है.
387 करोड़ की लागत से बनेगा पहला फेज, जानिए क्या है ग्राउंड रिपोर्ट
सुलतानगंज से देवघर के बीच बनने वाली इस फोरलेन सड़क को दो अलग-अलग चरणों में पूरा करने की योजना बनाई गई है. परियोजना के पहले चरण में सुलतानगंज से बेलहर तक कुल 40 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण किया जाएगा. इस प्रथम फेज के निर्माण कार्य पर लगभग 387 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. पहले चरण के लिए निर्माण कंपनी का चयन पूरा कर लिया गया है और शुरुआती स्तर पर स्थल पर काम भी प्रारंभ कर दिया गया है. सोमवार को खुद पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने सुलतानगंज पहुंचकर इस पूरे रूट का बारीकी से स्थलीय निरीक्षण किया. उन्होंने अभियंताओं और अधिकारियों के साथ सड़क निर्माण के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और लंबित फाइलों को तेजी से निपटाने के सख्त निर्देश दिए.
वन विभाग के एनओसी का इंतजार, जल्द दूर होगी सबसे बड़ी बाधा
सुलतानगंज-बेलहर फेज की प्रक्रिया कागजी तौर पर फाइनल हो चुकी है और काम शुरू हो चुका है, लेकिन इसके निर्माण की गति अभी पूरी तरह रफ्तार नहीं पकड़ पाई है. इसका मुख्य कारण वन विभाग से मिलने वाला अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी है. वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया अभी अंतिम दौर में फंसी हुई है. विभागीय सूत्रों और अधिकारियों के मुताबिक वन विभाग से एनओसी मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. जैसे ही वन विभाग की ओर से हरी झंडी मिलेगी, वैसे ही इस 387 करोड़ की फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा. इसके साथ ही दूसरे चरण में बेलहर से दर्दमारा तक सड़क निर्माण को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेजी से चल रही हैं.
कांवरिया पथ की बदलेगी तस्वीर, सफर का बदलेगा स्वरूप
इस फोरलेन सड़क के बन जाने के बाद सुलतानगंज से देवघर की कुल दूरी भले ही वही रहे, लेकिन सफर का पूरा अनुभव बदल जाएगा. फिलहाल उबड़-खाबड़ और संकरे रास्तों के कारण यात्रियों और कांवरियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. खासकर श्रावणी मेले के दौरान जब लाखों श्रद्धालु सरेराह पैदल और वाहनों से चलते हैं, तो भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. फोरलेन बनने से साल भर बाबाधाम जाने वाले श्रद्धालुओं और आम यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी. बेहतर सड़क से गाड़ियां फर्राटा भरेंगी और समय की भारी बचत होगी. स्थानीय व्यवसायियों और ट्रांसपोर्टरों के लिए भी यह सड़क आर्थिक प्रगति के नए द्वार खोलेगी.
विक्रमशिला सेतु बंद होने की चुनौती और अगुवानी पुल की समीक्षा
सुलतानगंज दौरे के दौरान सचिव पंकज कुमार पाल ने रविवार शाम डाकबंगला परिसर में अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक भी की. इस बैठक में आगामी 1 अक्टूबर से भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के बंद होने से उत्पन्न होने वाली गंभीर यातायात चुनौती पर विशेष चर्चा की गई. सेतु बंद होने के बाद यातायात को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों और संबंधित सड़क परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की गई. इसके अलावा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जा रहे सुलतानगंज-अगुवानी गंगा ब्रिज के निर्माण कार्य को भी निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं.
प्रशासनिक मुस्तैदी और आगे की स्थिति
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का गृह क्षेत्र होने के कारण सुलतानगंज-देवघर फोरलेन परियोजना को लेकर शासन और प्रशासन दोनों ही स्तरों पर विशेष सक्रियता देखी जा रही है. सचिव ने निरीक्षण के दौरान साफ लहजे में कहा कि किसी भी सूरत में काम में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. परियोजना के रास्ते में आने वाली सभी प्रशासनिक और तकनीकी बाधाओं को तुरंत दूर करने को कहा गया है. अब वन विभाग की एनओसी मिलते ही इस फोरलेन सड़क पर भारी मशीनें गरजती नजर आएंगी, जिससे आने वाले समय में बाबाधाम की राह न केवल आसान बल्कि बेहद आधुनिक भी हो जाएगी.
