सावन की पहली सोमवारी के लिए विभिन्न जिलों भागलपुर, बांका, मुंगेर, किशनगंज, कटिहार, अररिया समेत झारखंड के गोड्डा, दुमका से आये कांवरियों को रविवार को गंगा तटों व मार्ग में अलग-अलग परेशानी का सामना करना पड़ा. किसी घाट पर समुचित सुविधा नहीं दी गयी. खासकर बरारी पुल घाट पर जलकुंभी से कांवरियों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा, तो एसएम कॉलेज घाट मार्ग में जगह-जगह कूड़े प्वाइंट पर सड़ांध फैल रही थी. अभी तो कांवरियों की कम भीड़ है. भीड़ बढ़ने पर और परेशानी बढ़ जायेगी. बरारी पुल घाट पर महिलाओं को कपड़े बदलने के लिए अस्थायी घर बनाया गया था, लेकिन कांवरियों की संख्या के अनुसार कम था. बरारी पुल घाट में सफाई को लेकर पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. पार्षद प्रतिनिधि गोपाल कुमार ने बताया कि कम संसाधन में लगातार कांवरियों की सेवा को लेकर तत्पर हैं. जलकुंभी की सफाई के लिए अधिक मजदूर व संसाधन की जरूरत है. नगर निगम को समस्याओं से अवगत करा दिया गया. महिलाओं के कपड़ बदलने की सुविधा दी गयी है.
मार्गों में रोशनी व सफाई व्यवस्था का अभावकांवरिया मार्ग जैसे मनाली चौक से कचहरी चौक, त्रिमूर्ति चौक होते हुए भोलानाथ पुल, मिरजानहाट हो या बरारी से बायपास मार्ग में कांवरियों के लिए रोशनी की व्यवस्था नहीं होने के साथ सफाई व्यवस्था भी सुदृढ़ नहीं थी. इतना ही नहीं हरेक गंगा घाटों का रास्ता भी दुर्गम है. हालांकि, सुरक्षा को लेकर पुलिस की व्यवस्था पहले से सुदृढ़ थी. घाट पर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा था.
नहीं बना कांवरियों के लिए पंडाल शहर के किसी घाट पर कांवरियों के लिए पंडाल नहीं बनवाया गया और ना ही कहीं एंबुलेंस की व्यवस्था की गयी है. कूड़ा फेंकने के लिए भी कूड़ादान नहीं लगाया गया है. बरारी पुल घाट में कांवरियों का आना-जाना शुरू हाेने के बाद बिखरे छर्री को हटाया जा रहा था. इससे पहले कांवरियों को आने-जाने में सुइया मार्ग का एहसास हुआ. कांवरियों का नहीं हुआ रजिस्ट्रेशन पहले कांवरियों का रजिस्ट्रेशन सावन के रविवार को विभिन्न घाटों पर होता था. इस बार कहीं भी कांवरियों का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ. इससे डाक बम के लिए सरकारी आंकड़ा तैयार करना मुश्किल हुआ. कांवरियों का कहना है कि रजिस्ट्रेशन कराने से अनहोनी से निबटने में लाभ मिलता है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
