Bhagalpur News. बिना रिचार्ज के अब काले बटन से मिलेगी बिजली
स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को राहत.
-स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, बिना रिचार्ज 72 घंटे तक मिलेगी बिजली
ब्रजेश, भागलपुर.स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी व्यवस्था लागू की गयी है. अब यदि बिजली के स्मार्ट मीटर का बैलेंस समाप्त हो जाता है और तुरंत रिचार्ज कराना संभव नहीं हो पाता है, तो उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है. बैलेंस खत्म होने या माइनस में चले जाने की स्थिति में भी बंद बिजली चालू हो जायेगी. नयी व्यवस्था के तहत ऐसे उपभोक्ताओं को लगातार 72 घंटे तक बिना रिचार्ज के बिजली मिलती रहेगी. यह सुविधा विशेष रूप से प्रीपेड स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं के लिए है, ताकि आकस्मिक स्थिति में उन्हें परेशानी का सामना न करना पड़े. हालांकि इसके साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी है. यह राहत सुविधा एक महीने में केवल एक बार ही दी जायेगी. विद्युत सब डिवीजन के सहायक अभियंता प्रणव मिश्रा ने बताया कि कि इस व्यवस्था से उपभोक्ताओं को अस्थायी राहत मिलेगी और अनावश्यक परेशानी से बचाव होगा. स्मार्ट मीटर का बैलेंस यदि सात दिनों से माइनस में चल रहा है, तब भी उपभोक्ता राहत सुविधा का लाभ उठा सकेंगे.
स्मार्ट मीटर का काला बटन दिलायेगी राहत
मोजाहिदपुर विद्युत कार्यमंडल के कार्यपालक अभियंता पंकज कुमार के अनुसार स्मार्ट मीटर में बड़ा काला बटन लगा होता है. यही उपभोक्ताओं के लिए राहत का साधन बनेगा. बिना रिचार्ज के भी इसी बटन के जरिए 72 घंटे तक बिजली चालू करायी जा सकेगी. बिजली विभाग के अनुसार काले बटन को लगातार 30 सेकेंड तक दबाकर रखना होगा. इसके बाद स्मार्ट मीटर एक्टिव हो जायेगा और घर की बिजली चालू जायेगी.
जानें, एक्टिव कंज्यूमर और स्मार्ट मीटर
1. शहरी क्षेत्र : 1.80 लाख कंज्यूमरस्मार्ट मीटर : 1.31 लाखविद्युत सब डिवीजन : तिलकामांझी, मोजाहिदपुर, नाथनगर, सुलतानगंज (80 हजार)2. ग्रामीण क्षेत्र : 2.63 लाख कंज्यूमरस्मार्ट मीटर : 1.18 लाखविद्युत सब डिवीजन : अलीगंज, कहलगांव व विक्रमशिलास्मार्ट मीटर लगाने में अब सुस्त पड़ी एजेंसी
स्मार्ट मीटर लगाने की जिम्मेदारी जीनस पावर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को दी गयी है. शुरूआत के दिनों में विरोध के चलते तेजी नहीं आयी और अभी कंपनी की ओर से सुस्ती की वजह बनी है. यही कारण है कि शहरी क्षेत्र में करीब 49 हजार और ग्रामीण क्षेत्र में 1.45 लाख मीटर लगना बाकी है. कंपनी पर विभागीय दबाव का भी असर नहीं पड़ रहा है.—
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