स्मार्ट सिटी के दावे व जमीनी हकीकत : स्कूलों के सामने कूड़े का अंबार, भागलपुर की स्वच्छता व्यवस्था पर उठ रहे बड़े सवाल

Smart City Cleanliness: स्मार्ट सिटी और स्वच्छता रैंकिंग का दावा करने वाले भागलपुर में स्कूलों के ठीक सामने कूड़े-कचरे का ढेर लगा है. दुर्गंध, मच्छरों और गंदगी के बीच पढ़ाई करने को मजबूर छात्र अब व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं.

भागलपुर से दीपक राव की रिपोर्ट

Smart City Cleanliness: एक ओर सिल्क सिटी भागलपुर देश के स्मार्ट शहरों में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है और स्वच्छता रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर वार्ड संख्या 20 में जिला स्कूल, गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल समेत कई महत्वपूर्ण संस्थानों के सामने फैली गंदगी नगर निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है. शहर के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के बाहर कूड़े-कचरे का अंबार लोगों की चिंता का कारण बन गया है.

छात्रों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूलों के सामने जमा कूड़े से निकलने वाली दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है. इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है. अभिभावकों और शिक्षकों का मानना है कि इस अस्वच्छ माहौल का सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर पड़ रहा है.

बदबू के बीच पढ़ाई करने को मजबूर छात्र

स्कूलों के आसपास रहने वाले लोगों के अनुसार कूड़े के ढेर से उठने वाली बदबू के कारण विद्यार्थियों का कक्षाओं में बैठना तक मुश्किल हो गया है. कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद नियमित रूप से कूड़े का उठाव नहीं हो रहा है. स्थिति यह है कि आसपास के घरों से भी लगातार कचरा इसी स्थान पर फेंका जा रहा है, जिससे समस्या और गंभीर होती जा रही है.

प्रतियोगी परीक्षाओं के केंद्रों पर भी दिख रही गंदगी

जिला स्कूल, गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल और क्राइस्ट चर्च गर्ल्स हाई स्कूल शहर के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में शामिल हैं. यहां अक्सर नीट, सिपाही भर्ती, पॉलिटेक्निक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के केंद्र बनाए जाते हैं. हर सप्ताह हजारों छात्र-छात्राएं इन विद्यालयों में पहुंचते हैं, लेकिन स्कूलों के सामने फैली गंदगी शहर की छवि को प्रभावित कर रही है.

कूड़ेदान होने के बावजूद नहीं सुधर रही व्यवस्था

स्कूल के मुख्य द्वार के सामने नगर निगम की ओर से बड़ाकूड़ेदान रखा गया है. इसके बावजूद कचरा कूड़ेदान के भीतर कम और उसके आसपास अधिक दिखाई देता है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी भी कई बार कूड़ा निर्धारित स्थान के बजाय बाहर ही डालकर चले जाते हैं, जिससे पूरे इलाके में गंदगी फैल रही है.

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जतायी चिंता

वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. पंकज टंडन का कहना है कि गंदगी और दुर्गंध के कारण बच्चों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है. उन्होंने मांग की कि स्कूलों के सामने से कूड़ेदान हटाकर किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित किया जाए ताकि विद्यार्थियों को संक्रमण और बीमारियों के खतरे से बचाया जा सके.

स्थानीय लोगों ने सुनाई अपनी परेशानी

समीप के अपार्टमेंट निवासी प्रकाश शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में हर दिन हजारों लोग और छात्र-छात्राएं आवाजाही करते हैं.कूड़े से उत्पन्न मच्छर और दुर्गंध के कारण स्थानीय लोगों का जीवन भी प्रभावित हो रहा है. उनका कहना है कि नगर निगम को नियमित रूप से कूड़ा उठाव सुनिश्चित करना चाहिए.

पार्षद बोले, कई बार उठा चुके हैं मामला

वार्ड 20 के पार्षद नंदिकेश शांडिल्य ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर निगम की स्वास्थ्य शाखा में शिकायत की जा चुकी है. सामान्य बोर्ड की बैठकों में भी नियमित कूड़ा उठाव का मुद्दा उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है. उन्होंने कहा कि रात्रि में कूड़ा उठाव की व्यवस्था लागू होने पर सड़क पर गंदगी दिखाई नहीं देगी और समस्या काफी हद तक कम हो सकती है.

स्वच्छता अभियान की सफलता पर उठ रहे सवाल

शहर के प्रमुख विद्यालयों के सामने फैली गंदगी ने एक बार फिर स्वच्छता व्यवस्था की पोल खोल दी है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि जल्द ही प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या छात्रों के स्वास्थ्य के साथ-साथ शहर की छवि पर भी नकारात्मक असर डालती रहेगी.

Also Read: विक्रमशिला सेतु पर लग रहे फ्लेक्सिबल डिवाइडर, ओवरटेकिंग पर लगेगी रोक, जाम से मिलेगी राहत

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: AMIT KR SINHA

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >