bhagalpur news. समानांतर पुल निर्माण में देरी से सचिव नाराज, मई 27 तक पूरा करने का सख्त निर्देश

समानांतर पुल निर्माण में देरी से सचिव नाराज.

– सचिव ने कहा- बहाना नहीं, काम चाहिए, समय पर पूरा नहीं हुआ, तो विक्रमशिला सेतु का मेंटेनेंस भी सौंपा जायेगाभागलपुर और मुंगेर में आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने की दिशा में अधिकारियों की सक्रियता देखने को मिली. मुंगेर-भागलपुर मरीन ड्राइव परियोजना का जहां उच्चस्तरीय हवाई सर्वेक्षण किया गया, वहीं भागलपुर में विक्रमशिला सेतु की स्थिति की जांच के दौरान कई तकनीकी खामियां सामने आयी. समानांतर पुल निर्माण में देरी पर पथ निर्माण विभाग के सचिव ने कड़ा रुख अपनाया. मुंगेर में पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल, बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक शीर्षत कपिल अशोक, मुख्य महाप्रबंधक बबलू कुमार और जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पणीकर ने प्रस्तावित मरीन ड्राइव (गंगा पथ) के अलाइनमेंट का हवाई सर्वेक्षण किया. लगभग 80.02 किलोमीटर लंबी इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 9998 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

हेरू दियारा से सुलतानगंज तक किया गया हवाई सर्वेक्षण

मुंगेर के जिलाधिकारी निखिल धनराज ने बताया कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल तथा बीएसआरडी के निदेशक हवाई मार्ग से मुंगेर सफियाबाद स्थित हवाई अड्डा पहुंचे. वहां से उन्होंने मुंगेर जिले में घोषित गंगा पथ निर्माण के अलाइनमेंट का हवाई सर्वेक्षण किया. हेरू दियारा से लेकर सुलतानगंज तक हवाई सर्वेक्षण हुआ. साथ ही मुंगेर-मिर्जाचौकी फोरलेन, मुंगेर-मोकामा, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट सुलतानगंज तथा रक्सोल-हल्दिया फोरलेन का भी हवाई सर्वेक्षण किया गया. उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान एडग्रेड और जल मार्ग में बनने वाले सभी अलाइनमेंट का बारिकी से निरीक्षण किया गया है. निरीक्षण के पश्चात अलाइनमेंट की सारी रूप रेखा तैयार कर विभाग को सौंपी जायेगी.

मरीन ड्राइव के एलायमेंट में बदलाव की संभावना

मुंगेर-भागलपुर मरीन ड्राइव परियोजना के एलायमेंट में बदलाव की संभावना व्यक्त की जा रही है. इस बात का गहन अवलोकन किया जा रहा है कि मरीन ड्राइव घनी आबादी वाले इलाके से हटकर बने. इसके लिए एलिवेटेड पथ का निर्माण को प्रमुखता दी जा रही है. यह परियोजना दो चरणों में पूरा किया जायेगा. पहले फेज में मुंगेर के हेरू दियारा से लेकर अजगैबीनाथ धाम तक 42 किलोमीटर गंगा पथ बनना है. जिसपर लगभग 5119 करोड़ की खर्च आयेगी. जबकि दूसरे फेज में सुल्तानगंज से भागलपुर होते हुये सबौर तक 48.08 किलोमीटर पथ का निर्माण होगा. जिसपर 4849 करोड़ की लागत आयेगी.

विक्रमशिला सेतु के पीलरों की खामियां और खराब बॉल बेयरिंग दुरुस्त कराने का निर्देश

भागलपुर में पथ निर्माण विभाग के सचिव ने विक्रमशिला सेतु का स्थलीय निरीक्षण किया. बरारी गंगा घाट पर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, डीडीसी प्रदीप कुमार सिंह और अन्य अधिकारियों के साथ किये गये निरीक्षण में सेतु के कई पीलरों में बॉल बेयरिंग खराब पाये गये जाने की बात सामने आयी.यह तकनीकी खामी सेतु की दीर्घकालिक मजबूती के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है. सचिव ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को बॉल बेयरिंग बदलने और सेतु की मरम्मत का काम प्राथमिकता के आधार पर कराने का निर्देश दिया.

समानांतर फोरलेन पुल निर्माण कार्य की भी समीक्षा

समानांतर पुल के निर्माण कार्य की प्रगति की भी समीक्षा की. निर्माण एजेंसी द्वारा प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट पर उन्होंने नाराजगी जतायी और साफ शब्दों में कहा कि यदि मई 2027 तक पुल का निर्माण पूरा नहीं हुआ, तो पुराने सेतु के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी उसी एजेंसी को सौंपी जायेगी. जब एजेंसी ने अपनी समस्याएं बताने की कोशिश की तो सचिव ने स्पष्ट कहा कि बहाने नहीं, काम चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि कार्य में देरी होने पर मामला उच्च स्तर तक ले जाया जायेगा.

सवालों से बचते दिखे सचिव, डीएम पर डाली जिम्मेदारी

निरीक्षण के बाद पथ निर्माण विभाग के सचिव सवालों से बचते नजर आये. उन्होंने कहा कि वे केवल जिलाधिकारी से मिलने आये थे और अब पटना लौट रहे हैं. उन्होंने निरीक्षण से जुड़ी विस्तृत जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि इस संबंध में जानकारी जिलाधिकारी ही देंगे.

वहीं जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने भी तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की और कहा कि जिला प्रशासन की ओर से विस्तृत जानकारी जारी की जायेगी. वहीं, प्रधान सचिव के लौटते समय उनका टैब जिलाधिकारी के आवास पर छूट गया. इस वजह से उन्हें भागलपुर हवाई अड्डा पर कुछ देर इंतजार करना पड़ना. टैब मंगाकर देने के बाद वह पटना के लिए लौटे.

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