bhagalpur news. डेढ़ करोड़ के रंग व पिचकारी की बिक्री, 10 करोड़ के मेवा व मसाला भी बिके

इस बार होली में पूर्वी बिहार व संथाल परगना तक फैले भागलपुर बाजार में कारोबार बेहतर रहा. थोक व खुदरा बाजार में रंग, अबीर, पिचकारी, मेवा, खाद्यान्न व कपड़े की जम कर बिक्री हुई.

इस बार होली में पूर्वी बिहार व संथाल परगना तक फैले भागलपुर बाजार में कारोबार बेहतर रहा. थोक व खुदरा बाजार में रंग, अबीर, पिचकारी, मेवा, खाद्यान्न व कपड़े की जम कर बिक्री हुई. हड़ियापट्टी, फड़ियापट्टी, कलाली गली व आसपास बाजार में खचाखच भीड़ उमड़ी. केवल डेढ़ करोड़ से अधिक के रंग, पिचकारी व संबंधित सामान की बिक्री हुई. व्यंजनों में लगने वाले मेवा व मसाला का भी 10 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ. इतना ही नहीं होली संबंधित परिधान की बिक्री भी 10 करोड़ की हुई. इसके अलावा सब्जी, फल, नॉनवेज, रेडिमेड व्यंजन, मिठाई आदि की भी जमकर खरीदारी हुई. ऐसे में होली को लेकर 70 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हुआ. थोक कपड़ा व्यवसायी श्रवण बाजोरिया ने बताया कि होली पर कपड़े की बिक्री केवल छह से सात करोड़ रुपये की होती है. जबकि होली में दुरागमन को लेकर भी साड़ियां व शूटिंग-शर्टिंग की बिक्री भी हुई. कुरता-पाजामा कारोबारी रतीश झुनझुनवाला ने बताया कि होली को लेकर फैंसी कुर्ता, पंजाबी कुर्ता, रंग-बिरंगे कुर्ता-पायजामा, सफेद कुर्ता-पायजामा युवाओं की पसंद रही. भागलपुर में छोटे बड़े कुर्ता व पाजामा के 300 कारोबारी हैं. होली पर औसत 100 पीस बेचने पर भी 30 हजार पीस बिके. एक कुर्ता-पाजामा औसत 500 रुपये पीस बिकते हैं. ऐसे में डेढ़ करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ. वहीं कुर्ती कारोबारी विवेक केडिया ने बताया कि कुर्ती की भी बिक्री हुई. होली में एक करोड़ से अधिक की बिक्री हुई. इसके अलावा शहर के फुटपाथ पर 100 से 200 रुपये पीस में भी कुर्ता बिके. पिचकारी व्यवसायी कैलाश मावंडिया बताया कि रोजाना एक थोक दुकानदार एक से डेढ़ लाख रुपये का कारोबार कर लेता है, जबकि शहर में 50 से अधिक बड़ी दुकानें हैं. वहीं शहर में 200 से अधिक रिटेलर भी हैं, जो होली में 20 से 25 हजार रुपये से अधिक का कारोबार कर लेता है. रंग कारोबारी का का कहना है उनका रंग जिले के सभी प्रखंड में सप्लाई होता है, शहर में 25 से अधिक रंग कंपनी है. सभी कंपनी को मिला कर एक करोड़ से अधिक का रंग का कारोबार हुआ. किराना, मसाला व मेवा से 20 करोड़ का कारोबार थोक मसाला व मेवा करोबारी विनोद जैन ने बताया कि भागलपुर बाजार का क्षेत्र संथाल परगना, पूर्वी बिहार व आसपास 200 किलोमीटर तक फैला है. एक-एक थोक कारोबारी 15 से 20 लाख रुपये तक का कारोबार कर लेते हैं. जबकि भागलपुर में 25 थोक कारोबारी हैं. होली में गरीब-अमीर सभी के घरों में पकवान बनते हैं. पिछले साल से किशमिश, गरी गोला, मूंगफली, काजू, बादाम बड़ा, छोहरा की जमकर खरीदारी हुई. मसाला में सौंफ, लौंग, इलाइची, अजवाइन, हल्दी, धनिया, जीरा, काली मिर्च, दालचीनी, बड़ी इलाइची की बिक्री हुई. संबंधित कारोबारियों की मानें तो 10 से 12 करोड़ का कारोबार होली में आसानी से हो जाता है. किराना कारोबारी अमित सिंह ने बताया कि होली को लेकर मैदा, सुज्जी, चीनी, रिफाइन, घी, सरसों तेल, बेसन आदि की खूब बिक्री हुई. इससे छह से आठ करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है. रेडिमेड व्यंजन व मिठाई का रहा क्रेज अंग क्षेत्र भागलपुर, बांका आदि में पुआ, ठेकुआ, माल पुआ, दही बाड़ा, पूड़ी, पिरुकिया आदि का खास महत्व है. बाजार में भी रेडिमेड मालपुआ, ठेकुआ, गुजिया आदि बिके. आदर्श जलपान के संचालक बलराम झुनझुनवाला ने बताया कि रेडिमेड मालपुआ 30 रुपये पीस बिके, तो राजस्थानी रसभरे मालपुआ भी 30 रुपये पीस बिक. गुजिया 30 रुपये पीस और 650 रुपये किलो बिके. मेवा वाला बिना भांग की ठंडई 70 से 80 रुपये गिलास बिके. चिकेन व मटन की बढ़ी बिक्री और एक करोड़ का हुआ कारोबार होली को लेकर मंगलवार छोड़ सोमवार व बुधवार को चिकेन व मटन की जमकर बिक्री हुई. एक दिन में भागलपुर में एक करोड़ से अधिक के चिकेन व मटन की बिक्री हुई. मटन कारोबारियों ने बताया कि मांग बढ़ने के साथ ही 700-750 रुपये किलो वाले मटन का दाम बढ़ कर 800 से 1000 रुपये किलो हो गये थे, तो बर्ड फ्लू के प्रकोप के बाद भी लोगों ने चिकेन लेने से परहेज नहीं किया. चिकेन भी 160 से 180 रुपये किलो खड़ा बिके. भीखनपुर त्रिमूर्ति चौक के समीप, मिनी मार्केट, हड़ियापट्टी समीप मछली बाजार, तिलकामांझी, कटहलबाड़ी, जीरोमाइल, इशाकचक आदि में ग्राहकों की भीड़ थी. ग्राहकों को एक-एक घंटे तक मटन व चिकेन लेने के लिए इंतजार करना पड़ा. थोक चिकेन कारोबारी ने बताया कि चिकेन की इतनी मांग बढ़ गयी कि स्टॉक कम पड़ने लगा.

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By NISHI RANJAN THAKUR

NISHI RANJAN THAKUR is a contributor at Prabhat Khabar.

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